close

ApnaTube Android App ab available hai.
Videos dekhiye, points earn kijiye aur apna content upload kijiye. Download App: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.apnatube.in

次に

Day 46: एकाग्र चित्त, आत्मविशुद्धि और आसुरी भाव | हर हर गीता, हर घर गीता! Daily 5 Shlok Series (with

2 ビュー· 18/03/26
Jagatkasaar
Jagatkasaar
149 加入者
149
精神的

https://jagatkasaar.blogspot.c....om/2026/03/day-46-da

आज के 5 श्लोक:

तत्र एकाग्रं मनः कृत्वा—चित्त–इन्द्रिय क्रियाओं को वश में रखकर, आसन पर बैठकर आत्मविशुद्धि के लिए योगाभ्यास (6.12)

ब्राह्मण–क्षत्रिय–वैश्‍य–शूद्र कर्म—स्वभावप्रभव गुणों से विभक्त (18.41)

काम का अड्डा—इन्द्रियाँ, मन, बुद्धि – इन्हीं के द्वारा ज्ञान को ढँककर देही को मोहित करता है (3.40)

यत्र उपरमते चित्तम्—योगसेवया निरुद्ध चित्त आत्मा में संतुष्ट होता है (6.20 के भाव से जुड़ाव)

दम्भ, दर्प, अभिमान, क्रोध, पारुष्य, अज्ञान—आसुरी सम्पदा के लक्षण (16.4)

CTA:
कमेंट में लिखिए—"आज का मेरा श्लोक = (6.12/18.41/3.40/6.20/16.4)"
और "आज मैं किस जगह ‘एकाग्र चित्त + स्वभाव-धर्म + आसुरी भाव से सावधानी’ का अभ्यास करूँगा/करूँगी?"

もっと見せる

 0 コメント sort   並び替え


次に