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Day 133 | 5 Shlok Per Day | परमात्मा का स्वरूप, ध्यान का आसन, उपासना की भिन्नताएँ #jagatkasaar

1 意见· 23/06/26
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Day 133 | 5 Shlok Per Day | परमात्मा का स्वरूप, ध्यान का आसन, उपासना की भिन्नताएँ #jagatkasaar आज के 5 श्लोक बताते हैं कि देह में स्थित आत्मा ही उपद्रष्टा, अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा है, साधना के लिए शुद्ध और संतुलित आसन आवश्यक है, उपासना सात्त्विक-राजस-तामस भेद से भिन्न होती है, ॐ का जप परमगति का द्वार बनता है, और अर्जुन कर्म बनाम ज्ञान के प्रश्न को फिर से उठाता है। 13.22 और 8.13 साधक को परमात्मा की ओर उन्मुख करते हैं, जबकि 17.4 और 6.11 साधना के बाहरी और आंतरिक अनुशासन को स्पष्ट करते हैं।

Description
Day 133 में हर हर गीता, हर घर गीता mission के साथ सुनिए: देहस्थ आत्मा का उपद्रष्टा, अनुमन्ता, भर्ता, भोक्ता, महेश्वर और परमात्मा होना (13.22), ध्यान के लिए शुद्ध भूमि पर न बहुत ऊँचा न बहुत नीचा स्थिर आसन (6.11), देव-यक्ष-राक्षस-प्रेत-भूतगण उपासना में सात्त्विक, राजस और तामस भेद (17.4), ॐ का उच्चारण करते हुए निर्गुण ब्रह्म का स्मरण कर शरीर छोड़ने पर परमगति (8.13), और ज्ञान बनाम कर्म पर अर्जुन का प्रश्न (3.1)। यह episode Jagat Ka Saar को inner divinity, meditation setup, worship quality, and liberation through remembrance के साथ जोड़ता है.

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#day133 #5shlokperday #bhagavadgita #गीता #परमात्मा #ओम् #ध्यान #उपासना #हरहरगीता #हरघरगीता #जगतकासार #gitainhindi

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