close

Important Announcement
Title, thumbnail ya video me agar abusing, adult ya sexually explicit content paya gaya to channel bina kisi warning ke permanent delete kar diya jayega. Yeh rule turant lagu hai. Ab tak 350+ channels delete kiye ja chuke hain. Kripya kisi bhi prakar ka adult ya abusive content upload na karein. Rule violate hone par channel bina bataye delete ho jayega.


— Team ApnaTube

Berikutnya

घर के मंदिर में ये गलतियाँ न करें

5 Tampilan· 26/02/26
VIJAY SAINI
VIJAY SAINI
19 Pelanggan
19

⁣घर के मंदिर में ये गलतियाँ न करें
⁣हिन्दू शास्त्रों और वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मंदिर सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र और 'घर का हृदय' होता है, लेकिन कुछ देवी-देवताओं की मूर्तियों का साथ होना ऊर्जा के प्रवाह में टकराव पैदा कर सकता है:
शनि देव और हनुमान जी: इन दोनों की ऊर्जाएं एक-दूसरे के विपरीत मानी जाती हैं। जहाँ हनुमान जी को परम रक्षक माना जाता है, वहीं शनि देव का प्रभाव व्यक्ति पर कर्मफल और कठिन परीक्षाओं (जैसे साढ़े साती या ढैया) के रूप में होता है। चूँकि हनुमान जी की पूजा शनि के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए की जाती है, इसलिए उनकी ऊर्जाएं एक-दूसरे को संतुलित करने वाली और परीक्षण करने वाली होती हैं। यदि शनि देव की मूर्ति घर में रखी जाए, तो उन्हें हनुमान जी से अलग रखा जाना चाहिए।
देवी-देवताओं के उग्र रूप: देवताओं के क्रोधित या उग्र रूपों वाली मूर्तियाँ या चित्र रखने से बचना चाहिए। ऐसी मूर्तियाँ 'शांत समृद्धि' और 'बाधाओं के विनाश' के बीच कंपन का टकराव (Clashing vibrations) पैदा करती हैं, जो घर के वातावरण को प्रभावित कर सकता है।
दो शिवलिंग: एक ही मंदिर में दो अलग-अलग शिवलिंग रखना शुभ नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे ऊर्जा का असंतुलन पैदा हो सकता है। हालांकि, अर्धनारीश्वर या पारिवारिक शिवलिंग जैसे विशेष रूपों को रखा जा सकता है।
एक ही देवता की कई मूर्तियाँ: स्रोत यह भी बताते हैं कि एक ही मंदिर में एक ही देवता की एक से अधिक मूर्तियाँ या चित्र नहीं होने चाहिए।
ऊर्जा के संतुलन के लिए अन्य महत्वपूर्ण नियम:
मूर्तियों का आकार: घर के मंदिर में मूर्तियाँ बहुत बड़ी नहीं होनी चाहिए; इनकी आदर्श ऊंचाई 4 से 9 इंच के बीच होनी चाहिए।
दूरी और दिशा: मूर्तियों को दीवार से कम से कम 1 इंच दूर रखना चाहिए ताकि हवा का संचार हो सके, और मंदिर के लिए उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) सबसे शुभ दिशा है।
स्वच्छता और व्यवस्था: मंदिर में कभी भी बहुत अधिक भीड़ या अव्यवस्था नहीं होनी चाहिए। मूर्तियों को नियमित रूप से साफ करना चाहिए और वहां हमेशा एक दीपक (दीया) जलता रहना चाहिए, क्योंकि इसकी लौ स्थान को शुद्ध करती है और सकारात्मक ऊर्जा को सुदृढ़ करती

Menampilkan lebih banyak

 2 Komentar sort   Sortir dengan


NonstopMusic
NonstopMusic 7 jam yang lalu

जो भी हमारे चैनल पर वीडियो देखेगा हम भी उसको लाइक सब्सक्राइब करेंगे

0    0 Membalas
Kumawatmahesh932
Kumawatmahesh932 8 jam yang lalu

https://apnatube.in/watch/c6Tb18Qb26GJ5Ho

👆 Click and Like Subscribe 👆
आपको भी लाइक सब्सक्राइब मिलेगा ।

0    0 Membalas
Menampilkan lebih banyak

Berikutnya