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गोवर्धन पर्वत यानी गिर्राज जी की पावन तलहटी में होली खेलना एक अद्भुत और भक्तिमय अनुभव होता है। चारों ओर रंग, गुलाल और फूलों की वर्षा से वातावरण आनंदमय बन जाता है। भक्तजन भजन-कीर्तन करते हुए गिर्राज महाराज की परिक्रमा करते हैं और प्रेम से एक-दूसरे को रंग लगाते हैं। ढोल, मंजीरे और शंख की ध्वनि से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी हर्षोल्लास से होली मनाते हैं। ऐसा लगता है मानो स्वयं गिर्राज जी भक्तों को आशीर्वाद देकर उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि भर रहे हों।
ब्रज की होली पूरे भारत में अपनी अनोखी परंपराओं और भक्ति रस के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण-राधा की प्रेम लीलाओं की याद दिलाने वाला उत्सव है। विशेष रूप से बरसाना और नंदगाँव की लठमार होली विश्वभर में जानी जाती है। इस दिन नंदगाँव के पुरुष बरसाना आते हैं और महिलाएँ हँसी-मजाक में लाठियों से उन्हें मारती हैं, जबकि पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। चारों ओर गुलाल, रंग, ढोल, मंजीरे और राधे-राधे के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। ब्रज की होली प्रेम, उमंग और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम
KD Medical College Hospital and Research Center, मथुरा में नर्सिंग छात्राओं के बीच आयोजित रस्साकशी प्रतियोगिता का दृश्य बहुत रोमांचक और प्रेरणादायक होता है। खेल मैदान में सभी छात्राएँ पूरी ऊर्जा, आत्मविश्वास और टीम भावना के साथ रस्सी को मजबूती से पकड़कर अपनी ओर खींचती हैं। उनके चेहरों पर उत्साह और जीत का जज्बा साफ झलकता है। सहपाठी और शिक्षक तालियों व जयकारों से उनका हौसला बढ़ाते हैं। यह खेल शारीरिक शक्ति, संतुलन और आपसी सहयोग को बढ़ाता है। पढ़ाई के साथ ऐसे खेल मानसिक तनाव को कम करते हैं। अंत में विजेता टीम को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है, जिससे सभी में खेल भावना और आत्मविश्वास बढ़ता है।
KD Medical College Hospital and Research Center, मथुरा के खेल मैदान में नर्सिंग छात्र बैडमिंटन खेलते हुए बेहद उत्साहित और ऊर्जावान दिखाई देते हैं। सभी छात्र रैकेट हाथ में लेकर तेजी से शटल को मारते हुए अंक बनाने का प्रयास करते हैं। उनके बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और टीम भावना साफ नजर आती है। खेल के दौरान फुर्ती, संतुलन और एकाग्रता का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिलता है। साथी छात्र और शिक्षक तालियों से उनका उत्साह बढ़ाते हैं। पढ़ाई के साथ ऐसे खेल शारीरिक फिटनेस और मानसिक ताजगी प्रदान करते हैं। अंत में विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है, जिससे आत्मविश्वास और खेल भावना दोनों मजबूत होते हैं।
KD Medical College Hospital and Research Center, मथुरा के विशाल खेल मैदान में नर्सिंग छात्र रस्साकशी (टग ऑफ वॉर) प्रतियोगिता में पूरे उत्साह के साथ भाग लेते दिखाई देते हैं। सभी छात्र एकजुट होकर मजबूत पकड़ के साथ रस्सी को अपनी ओर खींचते हैं। उनके चेहरों पर जोश, साहस और जीतने का संकल्प झलकता है। साथी छात्र और शिक्षक तालियों तथा नारों से उनका उत्साह बढ़ाते हैं। यह खेल टीमवर्क, शारीरिक शक्ति और समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। पढ़ाई के साथ ऐसे खेल विद्यार्थियों को मानसिक ताजगी और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। अंत में विजेता टीम को सम्मानित किया जाता है, जिससे खेल भावना और भी प्रबल होती
KD Medical College Hospital and Research Center, मथुरा के परिसर में नर्सिंग छात्र-छात्राएँ उत्साह के साथ रस्साकशी (टग ऑफ वॉर) खेलते हुए नजर आते हैं। मैदान में दोनों टीमें पूरी ताकत और एकता के साथ रस्सी को अपनी ओर खींचती हैं। सभी के चेहरों पर जोश, आत्मविश्वास और जीतने की ललक साफ दिखाई देती है। साथी छात्र और शिक्षक तालियों व नारों से उनका उत्साह बढ़ाते हैं। यह खेल टीमवर्क, संतुलन और शारीरिक शक्ति का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे खेल छात्रों को मानसिक तनाव से राहत देते हैं। अंत में विजेता टीम को सम्मानित किया जाता है, जिससे सभी में खेल भावना और भाईचारा मजबूत होता है।
केडी यूनिवर्सिटी मथुरा में नर्सिंग स्टूडेंट्स की कबड्डी खेलते हुए। केडी मेडिकल यूनिवर्सिटी के स्टूडे
KD University के परिसर में नर्सिंग छात्रों की कबड्डी प्रतियोगिता उत्साह और ऊर्जा से भरी हुई दिखाई देती है। मैदान में छात्राएँ टीम भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ खेलती हैं। सफेद यूनिफॉर्म में सजी छात्राएँ “कबड्डी-कबड्डी” बोलते हुए तेजी से विरोधी टीम को छूकर अंक हासिल करती हैं। दर्शक छात्र और शिक्षक तालियों से उनका हौसला बढ़ाते हैं। खेल के दौरान सहयोग, नेतृत्व और फिटनेस का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिलता है। यह प्रतियोगिता पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक विकास और मानसिक ताजगी भी प्रदान करती है। अंत में विजेता टीम को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है, जिससे सभी में खेल भावना और बढ़ती है।
KD University के परिसर में नर्सिंग छात्रों की कबड्डी प्रतियोगिता उत्साह और ऊर्जा से भरी हुई दिखाई देती है। मैदान में छात्राएँ टीम भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ खेलती हैं। सफेद यूनिफॉर्म में सजी छात्राएँ “कबड्डी-कबड्डी” बोलते हुए तेजी से विरोधी टीम को छूकर अंक हासिल करती हैं। दर्शक छात्र और शिक्षक तालियों से उनका हौसला बढ़ाते हैं। खेल के दौरान सहयोग, नेतृत्व और फिटनेस का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिलता है। यह प्रतियोगिता पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक विकास और मानसिक ताजगी भी प्रदान करती है। अंत में विजेता टीम को पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाता है, जिससे सभी में खेल भावना और बढ़ती है।
राधारानी जी की सुबह की आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी और दिव्य होता है। प्रातःकाल मंदिर के द्वार खुलते ही घंटियों की मधुर ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बना देती है। दीपों की उज्ज्वल लौ के साथ पुजारी जी आरती करते हैं और राधारानी के श्रीविग्रह का श्रृंगार किया जाता है। फूलों की सुगंध, शंखनाद और भजन-कीर्तन से मन शुद्ध हो जाता है। दर्शन करते समय ऐसा अनुभव होता है मानो राधारानी स्वयं भक्तों पर करुणा की दृष्टि डाल रही हों। उनकी मुस्कान हृदय में शांति, प्रेम और आनंद भर देती
प्रातःकाल राधारानी जी की सुबह की आरती अत्यंत दिव्य और मन को शांति देने वाली होती है। मंदिर में घंटियों की मधुर ध्वनि, धूप-दीप की सुगंध और भक्तों के भजन वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। जैसे ही राधारानी के श्रीविग्रह के पट खुलते हैं, उनके कोमल मुखमंडल पर सजी मुस्कान मन को मोह लेती है। आरती के समय दीपक की लौ में राधारानी की छवि झलकती है, जिससे हृदय आनंद और श्रद्धा से भर जाता है। दर्शन करते हुए भक्त अपने सारे दुःख भूलकर प्रेम, भक्ति और शांति का अनुभव करता है। राधारानी का सुबह का दर्शन दिन को पवित्र और मंगलमय बना देता है। 🌸
प्रातःकाल राधारानी जी की आरती का दृश्य अत्यंत मनोहारी और भक्तिमय होता है। मंदिर में घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और “राधे-राधे” के जयकारों से वातावरण पवित्र हो उठता है। दीपों की उज्ज्वल लौ राधारानी के श्रीविग्रह को आलोकित करती है, मानो करुणा और प्रेम स्वयं मुस्कुरा रहे हों। केसरिया और पुष्पों से सजी हुई छवि मन को शांति देती है। आरती के समय भक्त नतमस्तक होकर दर्शन करते हैं, हृदय श्रद्धा से भर जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि राधारानी अपनी कृपा से सभी दुख हर लेती हैं और जीवन में प्रेम, भक्ति व आनंद का संचार करती हैं।
राधारानी जी की सुबह की आरती का समय भक्तों के लिए अत्यंत पावन होता है। मंदिर में घंटियों की मधुर ध्वनि और “जय श्री राधे” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। श्वेत और गुलाबी फूलों से सजी राधारानी की अलौकिक छवि मन को शांति प्रदान करती है। दीपों की लौ के साथ आरती गाई जाती है, जिससे हृदय में प्रेम और भक्ति का संचार होता है। दर्शन करते समय भक्त अपने सभी दुःख भूलकर राधारानी के चरणों में समर्पित हो जाते हैं। सुबह की यह आरती जीवन में सकारात्मकता और दिव्य आनंद भर देती है।
प्रातःकाल राधारानी जी के दर्शन अत्यंत शांत और दिव्य अनुभूति कराते हैं। जैसे ही सुबह की पहली किरणें मंदिर प्रांगण में फैलती हैं, वातावरण भक्ति और प्रेम से भर जाता है। राधारानी जी का सजीव श्रृंगार, कमल जैसे नेत्र और सौम्य मुस्कान भक्तों के मन को आनंदित कर देती है। घंटियों की मधुर ध्वनि, मंत्रोच्चार और फूलों की सुगंध से मन एकाग्र हो जाता है। इस समय किया गया दर्शन आत्मा को शांति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है तथा दिन भर के लिए मन को प्रसन्न और निर्मल बना देता है।
प्रातःकाल राधारानी जी के दर्शन अत्यंत शांत और दिव्य अनुभूति कराते हैं। जैसे ही सुबह की पहली किरणें मंदिर प्रांगण में फैलती हैं, वातावरण भक्ति और प्रेम से भर जाता है। राधारानी जी का सजीव श्रृंगार, कमल जैसे नेत्र और सौम्य मुस्कान भक्तों के मन को आनंदित कर देती है। घंटियों की मधुर ध्वनि, मंत्रोच्चार और फूलों की सुगंध से मन एकाग्र हो जाता है। इस समय किया गया दर्शन आत्मा को शांति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है तथा दिन भर के लिए मन को प्रसन्न और निर्मल बना देता है।
प्रातःकाल राधारानी जी के दर्शन अत्यंत शांत और दिव्य अनुभूति कराते हैं। जैसे ही सुबह की पहली किरणें मंदिर प्रांगण में फैलती हैं, वातावरण भक्ति और प्रेम से भर जाता है। राधारानी जी का सजीव श्रृंगार, कमल जैसे नेत्र और सौम्य मुस्कान भक्तों के मन को आनंदित कर देती है। घंटियों की मधुर ध्वनि, मंत्रोच्चार और फूलों की सुगंध से मन एकाग्र हो जाता है। इस समय किया गया दर्शन आत्मा को शांति, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है तथा दिन भर के लिए मन को प्रसन्न और निर्मल बना देता है।
1 जनवरी की पावन सुबह नए साल का शुभ संदेश लेकर आती है। इस दिन श्रीराधारानी के दर्शन करने से मन को अपार शांति और आनंद की अनुभूति होती है। भक्तजन दूर-दूर से बरसाना धाम पहुंचकर राधारानी के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हैं। मंदिर में भक्ति, प्रेम और उल्लास का अद्भुत वातावरण रहता है। घंटियों की मधुर ध्वनि, भजनों का गान और पुष्पों की सुगंध मन को पवित्र कर देती है। नए साल की शुरुआत राधारानी के दर्शन से करने पर जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ब्रज की पावन धरती पर राधारानी जी की सुबह की आरती अत्यंत दिव्य और मन को शांति देने वाली होती है। प्रातःकाल मंदिर के कपाट खुलते ही घंटियों की मधुर ध्वनि गूंज उठती है। सुगंधित पुष्पों, धूप और दीप की लौ के साथ राधारानी जी का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। भक्त एकाग्र मन से “जय राधे” का उच्चारण करते हुए दर्शन करते हैं। आरती के समय राधारानी के मुख पर अद्भुत तेज और करुणा झलकती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो माता स्वयं भक्तों पर कृपा बरसा रही हों। इस पावन दर्शन से मन श्रद्धा, भक्ति और आनंद से भर जाता है। 🌸🙏
राधारानी की सुबह की आरती का समय भक्तों के लिए अत्यंत पावन और मन को शांति देने वाला होता है। प्रातःकाल मंदिर के कपाट खुलते ही वातावरण भक्तिरस से भर जाता है। घंटियों की मधुर ध्वनि और शंखनाद के साथ “जय श्री राधे” के जयकारे गूंज उठते हैं। राधारानी को नवीन वस्त्र, फूलों की माला और सुगंधित पुष्प अर्पित किए जाते हैं। आरती के दीपक की उज्ज्वल लौ उनके श्रीमुख को आलोकित करती है। दर्शन करते हुए भक्तों का हृदय प्रेम, श्रद्धा और आनंद से भर जाता है। ऐसा अनुभव होता है मानो राधारानी स्वयं करुणा और स्नेह की वर्षा कर रही हों।
प्रातःकाल राधारानी जी के दर्शन अत्यंत मनोहारी और शांति से भर देने वाले होते हैं। सुबह की हल्की रोशनी में जब मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो घंटियों और शंखनाद की मधुर ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बना देती है। राधारानी जी के श्रीविग्रह पर सजी ताजे फूलों की माला और कोमल वस्त्र उनकी दिव्य छवि को और भी सुंदर बना देते हैं। आरती के समय दीपों की ज्योति और भजनों का स्वर मन को शुद्ध कर देता है। भक्त श्रद्धा से नतमस्तक होकर दर्शन करते हैं और आत्मिक शांति व आनंद का अनुभव करते हैं।
यह आदमी गरीबी में रहते हुए भी खुश है, क्योंकि उसके पास संतोष और सुकून है। साधारण जीवन, मेहनत की रोटी और अपनों का साथ उसे भीतर से समृद्ध बनाता है। दूसरी ओर, महलों में रहने वाले अनेक लोग अपार धन-संपत्ति के बावजूद भी खुश नहीं हैं। उनके पास सुविधाएँ तो हैं, पर मन की शांति नहीं। इच्छाओं की कोई सीमा न होने से वे हमेशा किसी न किसी अभाव में उलझे रहते हैं। सच्ची खुशी धन से नहीं, बल्कि सरलता, संतुलन और संतोष से मिलती है। यही कारण है कि झोपड़ी में रहने वाला यह आदमी मुस्कुराता है, जबकि भव्य महलों में रहने वाले भी खालीपन महसूस करते हैं।
