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rajendra bijarnia
3 vistas · 3 meses hace

हाँ, प्रेगनेंसी में खजूर खाना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। इसमें आयरन, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम और प्राकृतिक शुगर होती है, जो गर्भवती महिला और बच्चे दोनों के लिए लाभकारी हो सकती है।
इसके कुछ फायदे:
शरीर को ऊर्जा मिलती है
कब्ज की समस्या में राहत मिल सकती है
हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद कर सकता है
बच्चे के विकास के लिए जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं
आखिरी महीनों में खजूर खाना सामान्य डिलीवरी में मददगार माना जाता है
ध्यान रखने वाली बातें:
रोज़ 2–4 खजूर पर्याप्त होते हैं
अगर आपको शुगर या Gestational Diabetes है, तो डॉक्टर से पूछकर ही खाएं
ज्यादा मात्रा में खाने से वजन या शुगर बढ़ सकती है

rajendra bijarnia
3 vistas · 3 meses hace

प्रेग्नेंट हो .. सिर्फ बाएं करवट सोना

rajendra bijarnia
6 vistas · 3 meses hace

हाँ, प्रेगनेंसी में अंजीर (figs) खाना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है — लेकिन सही मात्रा में।
✔️ अंजीर खाने के फायदे
हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद: अंजीर में आयरन होता है, जो खून की कमी (एनीमिया) से बचाने में सहायक है
पाचन सुधारता है: इसमें फाइबर ज्यादा होता है, जिससे कब्ज की समस्या कम होती है (जो प्रेगनेंसी में आम है)
कैल्शियम का अच्छा स्रोत: यह माँ और बच्चे की हड्डियों के लिए अच्छा है
ऊर्जा देता है: नेचुरल शुगर होने से तुरंत एनर्जी मिलती है
⚠️ कितनी मात्रा में खाएं?
दिन में 1–2 सूखे अंजीर या 2–3 ताजे अंजीर काफी हैं
ज्यादा खाने से दस्त या ब्लड शुगर बढ़ सकती है
❗ कब सावधानी रखें?
अगर आपको डायबिटीज (शुगर) है तो डॉक्टर से पूछकर ही खाएं
बहुत ज्यादा खाने से पेट खराब हो सकता है
हमेशा अंजीर को अच्छे से धोकर या सूखे अंजीर को भिगोकर खाएं
👉 निष्कर्ष:
हाँ, अंजीर प्रेगनेंसी में फायदेमंद है, बस संतुलित मात्रा में खाएं।

rajendra bijarnia
9 vistas · 3 meses hace

हाँ, प्रेगनेंसी में गर्मियों में बादाम खा सकते हैं, लेकिन सही मात्रा और तरीके का ध्यान रखना ज़रूरी है।
✔️ फायदे
बादाम में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन E होता है
बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट में मदद करता है
माँ की एनर्जी और इम्यूनिटी बढ़ाता है
⚠️ ध्यान रखने वाली बातें
गर्मियों में बादाम तासीर में गरम माने जाते हैं
ज़्यादा खाने से गर्मी, एसिडिटी या पाचन समस्या हो सकती है
👍 सही तरीका
रोज़ 4–6 बादाम ही लें
रातभर पानी में भिगोकर सुबह छिलका हटाकर खाएं
खाली पेट खाना ज्यादा फायदेमंद होता है
❌ कब सावधानी रखें
अगर आपको एसिडिटी, ज्यादा गर्मी लगना या डॉक्टर ने मना किया हो
या कोई एलर्जी हो
👉 निष्कर्ष:
सीमित मात्रा में भिगोए हुए बादाम गर्मियों में भी प्रेगनेंसी में सुरक्षित और फायदेमंद हैं।

rajendra bijarnia
6 vistas · 3 meses hace

प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) में हीमोग्लोबिन (Hb) का स्तर सामान्य से थोड़ा ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इससे माँ और बच्चे दोनों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।
👉 गर्भावस्था में सामान्य हीमोग्लोबिन स्तर:
11 से 13 ग्राम/डेसीलीटर (g/dL) — अच्छा और सामान्य माना जाता है
10–10.9 g/dL — हल्की कमी (माइल्ड एनीमिया)
7–9.9 g/dL — मध्यम एनीमिया
7 g/dL से कम — गंभीर एनीमिया (खतरे का संकेत)
💡 डॉक्टर आमतौर पर चाहते हैं कि Hb कम से कम 11 g/dL रहे।
अगर हीमोग्लोबिन कम हो तो:
आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां दी जाती हैं
खाने में शामिल करें:
हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी)
चुकंदर, अनार
गुड़, खजूर
दालें, बीन्स
विटामिन C (नींबू, संतरा) — आयरन को अवशोषित करने में मदद करता है

rajendra bijarnia
5 vistas · 3 meses hace

क्या आपको पेट में बच्चे की हलचल महसूस होती है ?

rajendra bijarnia
4 vistas · 3 meses hace

हेअल्थी प्रेगनेंसी के लिए रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतें बहुत फर्क डालती हैं। इन 7 बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
1. संतुलित और पौष्टिक आहार लें
हरी सब्जियाँ, फल, दालें, प्रोटीन (दूध, अंडा, पनीर) और आयरन-कैल्शियम से भरपूर खाना खाएं। जंक फूड से दूरी रखें।
2. नियमित डॉक्टर चेक-अप कराएं
समय-समय पर जांच करवाने से माँ और बच्चे दोनों की स्थिति पर नजर रहती है और किसी भी समस्या का समय पर पता चल जाता है।
3. फोलिक एसिड और सप्लीमेंट लें
डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम की दवाइयाँ लें—ये बच्चे के विकास के लिए जरूरी हैं।
4. पर्याप्त पानी पिएं
दिन में 8–10 गिलास पानी पिएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और थकान कम हो।
5. हल्की एक्सरसाइज करें
जैसे वॉक, प्रेगनेंसी योग (डॉक्टर की सलाह से)। इससे शरीर एक्टिव रहता है और डिलीवरी में भी मदद मिलती है।
6. तनाव से दूर रहें
ज्यादा तनाव लेने से बच्चे पर असर पड़ सकता है। खुश रहें, संगीत सुनें और पॉजिटिव माहौल रखें।
7. पूरी नींद लें
रोज़ 7–8 घंटे की नींद बहुत जरूरी है, ताकि शरीर को आराम मिले और बच्चे का सही विकास हो।

rajendra bijarnia
4 vistas · 3 meses hace

गर्भावस्था के 9वें महीने में पेट में मरोड़ (cramps) होना आम बात भी हो सकती है और कभी-कभी डिलीवरी के नज़दीक आने का संकेत भी। इसका मतलब स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है:
सामान्य कारण
Braxton Hicks contractions (फॉल्स लेबर)
हल्के-हल्के मरोड़ जो अनियमित होते हैं, कुछ देर बाद अपने-आप ठीक हो जाते हैं।
बच्चे का नीचे की ओर आना (lightening)
डिलीवरी के करीब बच्चा नीचे आता है, जिससे दबाव और हल्का दर्द महसूस होता है।
गैस या पाचन की समस्या
पेट में गैस या कब्ज के कारण भी मरोड़ जैसा दर्द हो सकता है।
डिलीवरी के संकेत हो सकते हैं अगर:
दर्द नियमित अंतराल पर आए (जैसे हर 5–10 मिनट में)
समय के साथ दर्द तेज और लंबे समय तक रहने लगे
साथ में पानी की थैली फटना या ब्लीडिंग हो
कमर से शुरू होकर पेट तक दर्द फैलना
👉 ये लेबर पेन (Labour pain) की शुरुआत हो सकती है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
बहुत तेज या लगातार दर्द
बच्चे की हलचल कम लगे
पानी निकलना या खून आना
चक्कर, बुखार या कमजोरी
क्या करें
आराम करें और शरीर को रिलैक्स रखें
पानी ज्यादा पिएं
दर्द के पैटर्न (कितनी देर और कितनी बार) नोट करें

rajendra bijarnia
7 vistas · 3 meses hace

अगर गर्भ में बच्चा कमजोर (growth कम) लग रहा है, तो सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही आप ये 4 चीज़ें जरूर अपनाएं:
1. पौष्टिक आहार लें
प्रोटीन से भरपूर चीजें खाएं: दूध, दही, पनीर, दाल, अंडा
आयरन और फोलिक एसिड: हरी सब्जियां, चुकंदर, अनार
फल: केला, सेब, संतरा
➡️ ये बच्चे के वजन और विकास में मदद करते हैं
2. पर्याप्त आराम करें
दिन में कम से कम 8 घंटे की नींद लें
ज्यादा थकान और भारी काम से बचें
➡️ आराम से बच्चे की ग्रोथ बेहतर होती है
3. डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयां नियमित लें
आयरन, कैल्शियम, और फोलिक एसिड की गोलियां समय पर लें
बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें
4. तनाव से दूर रहें
ज्यादा चिंता या तनाव बच्चे की ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है
हल्की वॉक, योग या मेडिटेशन करें
👉 जरूरी बात:
अगर डॉक्टर ने बताया है कि बच्चे की ग्रोथ बहुत कम है (IUGR), तो नियमित जांच (अल्ट्रासाउंड) कराना जरूरी है ताकि सही समय पर सही इलाज हो सके।

rajendra bijarnia
4 vistas · 3 meses hace

गर्भावस्था के 7वें महीने (लगभग 28 से 31 सप्ताह) में बच्चे का विकास काफी तेजी से होता है। इस समय आपका शिशु अब पहले से ज्यादा सक्रिय और मजबूत बन चुका होता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं:
🤱 बच्चे का विकास (7वां महीना)
1. वजन और लंबाई
बच्चे का वजन लगभग 1 से 1.5 किलो तक हो जाता है
लंबाई करीब 35–40 सेमी होती है
2. दिमाग का विकास
बच्चे का ब्रेन तेजी से विकसित हो रहा होता है
सोचने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ती है
3. हरकत (Movement)
बच्चा अब ज्यादा किक और मूवमेंट करता है
मां को दिन में कई बार हलचल महसूस होती है
4. आंख और सुनने की क्षमता
बच्चा आंखें खोल और बंद कर सकता है
बाहर की आवाज़ें सुन सकता है, जैसे मां की आवाज
5. फेफड़ों का विकास
फेफड़े अभी पूरी तरह विकसित नहीं होते, लेकिन सांस लेने की तैयारी शुरू हो जाती है
6. शरीर पर चर्बी (Fat)
बच्चे के शरीर पर धीरे-धीरे फैट जमा होना शुरू हो जाता है, जिससे शरीर भरा हुआ दिखने लगता है
7. नींद और जागने का पैटर्न
बच्चा अब सोने और जागने का रूटीन बनाने लगता है
⚠️ मां को क्या महसूस हो सकता है?
पेट में खिंचाव और भारीपन
पैरों में सूजन
ज्यादा भूख लगना
बार-बार पेशाब आना
💡 ध्यान रखने वाली बातें
पौष्टिक आहार लें (फल, दूध, हरी सब्जियां)
पर्याप्त पानी पिएं
हल्की एक्सरसाइज (डॉक्टर की सलाह से)
बच्चे की मूवमेंट पर ध्यान दें

rajendra bijarnia
5 vistas · 3 meses hace

प्रेगनेंसी में पेट पर काली लाइन कब बनती है

rajendra bijarnia
5 vistas · 3 meses hace

गर्भावस्था के दौरान छोटी-छोटी गलतियाँ भी माँ और बच्चे दोनों की सेहत पर असर डाल सकती हैं। यहाँ 5 आम गलतियाँ हैं जो गर्भवती महिलाएँ अक्सर कर बैठती हैं — और जिनसे बचना जरूरी है:
1. सही खान-पान पर ध्यान न देना
कई महिलाएँ या तो कम खाती हैं या फिर जंक फूड ज्यादा लेती हैं।
👉 जरूरी है कि संतुलित आहार लें — जिसमें फल, हरी सब्जियाँ, प्रोटीन और आयरन भरपूर हो।
2. डॉक्टर की सलाह को नजरअंदाज करना
कुछ लोग बिना सलाह के दवाइयाँ या घरेलू नुस्खे अपनाते हैं।
👉 हर दवा या सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें।
3. पानी कम पीना
गर्भावस्था में शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है।
👉 पानी कम पीने से डिहाइड्रेशन और कमजोरी हो सकती है।
4. ज्यादा आराम या बिल्कुल भी एक्सरसाइज न करना
कुछ महिलाएँ पूरे समय आराम करती हैं, जबकि कुछ बिल्कुल भी आराम नहीं करतीं।
👉 हल्की एक्सरसाइज जैसे वॉक करना बहुत फायदेमंद होता है (डॉक्टर की सलाह से)।
5. तनाव लेना और नींद पूरी न करना
टेंशन और नींद की कमी बच्चे के विकास पर असर डाल सकती है।
👉 रोजाना 7–8 घंटे की नींद लें और खुद को रिलैक्स रखें।

rajendra bijarnia
8 vistas · 3 meses hace

गर्मियों में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को ठंडा, हाइड्रेटेड और एनर्जी से भरपूर रखना बहुत ज़रूरी होता है। कुछ हेल्दी “सुपर ड्रिंक्स” हैं जो गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं:
🥥 1. नारियल पानी
शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है
इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर
उल्टी और एसिडिटी में मददगार
🍋 2. नींबू पानी (शिकंजी)
विटामिन C से भरपूर
डिहाइड्रेशन से बचाता है
मतली (nausea) कम करता है
🥛 3. ठंडा दूध
कैल्शियम और प्रोटीन का अच्छा स्रोत
बच्चे की हड्डियों के विकास के लिए जरूरी
🍉 4. तरबूज का जूस
शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता
ठंडक देता है
कब्ज में राहत
🥭 5. आम पन्ना (Aam Panna)
लू से बचाता है
शरीर को ठंडा रखता है
पाचन में मदद करता है
🌿 6. छाछ (Buttermilk)
पाचन के लिए बहुत अच्छा
गैस और एसिडिटी कम करता है
शरीर को ठंडा रखता है
🍓 7. फ्रूट स्मूदी (बिना ज्यादा शक्कर)
अलग-अलग फलों से पोषण मिलता है
एनर्जी और विटामिन्स से भरपूर
⚠️ ध्यान रखने वाली बातें:
बहुत ज्यादा ठंडे (ice-cold) ड्रिंक्स से बचें
बाहर के पैकेट वाले जूस या सोडा न लें
शुगर कम रखें
डॉक्टर से सलाह लेकर ही कुछ नया शामिल करें

rajendra bijarnia
8 vistas · 3 meses hace

🚫 क्या नहीं खाना चाहिए:
1. कच्चा या अधपका खाना
कच्चा अंडा (raw egg), half fry
अधपका मांस (chicken, mutton)
👉 इसमें bacteria (infection) का खतरा होता है
2. बिना उबाला दूध / unpasteurized dairy
कच्चा दूध
soft cheese (जैसे feta, brie)
👉 infection का risk
3. ज्यादा caffeine
ज्यादा चाय, coffee
energy drinks
👉 दिन में 1–2 cup से ज्यादा नहीं
4. ज्यादा मसालेदार, oily और junk food
chips, burger, pizza
👉 acidity, gas और weight issues
5. पपीता (Papaya) और अनानास (Pineapple)
खासकर कच्चा पपीता
👉 miscarriage का risk बढ़ा सकता है (traditional advice)
6. alcohol और smoking
👉 पूरी तरह avoid करना चाहिए (baby के लिए बहुत harmful)
7. ज्यादा मीठा और processed food
cold drinks, bakery items
👉 gestational diabetes का खतरा
8. high mercury fish
जैसे shark, swordfish
👉 baby के brain development पर असर
9. बचा हुआ या बासी खाना
👉 food poisoning का खतरा

rajendra bijarnia
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