rajendra bijarnia
rajendra bijarnia

rajendra bijarnia

      |      

Assinantes

   Calção

rajendra bijarnia
1 Visualizações · 2 meses atrás

हाँ, प्रेगनेंसी में अमरूद खाना आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है। अमरूद में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो माँ और बच्चे दोनों की सेहत के लिए अच्छे होते हैं।
इसके फायदे:
विटामिन C से भरपूर — इम्यूनिटी मजबूत करने में मदद करता है
फाइबर अच्छा होता है — कब्ज की समस्या कम कर सकता है
फोलेट मौजूद होता है — बच्चे के विकास के लिए जरूरी
ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है
पाचन को बेहतर बनाता है
कैसे खाएं:
अच्छी तरह धोकर खाएं
पका हुआ अमरूद ज्यादा बेहतर माना जाता है
सीमित मात्रा में खाएं, जैसे 1 मध्यम अमरूद प्रतिदिन
किन महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए:
अगर गैस या पेट फूलने की समस्या ज्यादा रहती है
बहुत ज्यादा कच्चा अमरूद खाने से पेट में असहजता हो सकती है
किसी खास मेडिकल समस्या या डॉक्टर की डाइट सलाह हो तो उसी को प्राथमिकता दें

rajendra bijarnia
0 Visualizações · 2 meses atrás

ये संकेत दिखे तो समझ जाये डिलीवरी 24 से 48 घंटे में होने वाली है

rajendra bijarnia
2 Visualizações · 3 meses atrás

प्रेगनेंसी के 9 वे महीने में ये 3 गलतिया कभी नही करना

rajendra bijarnia
3 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
2 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
3 Visualizações · 3 meses atrás

प्रेगनेंसी के आखिरी दिनों में कुछ ऐसे संकेत (लक्षण) दिख सकते हैं जो बताते हैं कि 24 घंटे के अंदर डिलीवरी शुरू हो सकती है। हर महिला में ये अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर ये संकेत काफी कॉमन होते हैं:
🔹 1. बार-बार और नियमित दर्द (Labour Pain)
पेट या कमर में नियमित अंतराल पर तेज दर्द शुरू होना
दर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और बीच का गैप कम होता जाता है
👉 यह सबसे पक्का संकेत है कि लेबर शुरू हो चुका है
🔹 2. म्यूकस प्लग निकलना (Bloody Show)
सफेद या गुलाबी/हल्का खून मिला चिपचिपा डिस्चार्ज निकलना
👉 इसका मतलब है कि शरीर डिलीवरी के लिए तैयार हो रहा है
🔹 3. पानी की थैली फटना (Water Break)
योनि से पानी जैसा फ्लूइड निकलना (धीरे-धीरे या अचानक)
👉 इसके बाद आमतौर पर 24 घंटे के अंदर डिलीवरी हो जाती है
🔹 4. बार-बार पेशाब या दबाव महसूस होना
बच्चे का सिर नीचे आने से पेल्विक एरिया में दबाव बढ़ जाता है
👉 इससे बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा होती है
🔹 5. सर्विक्स का खुलना (Cervix Dilate होना)
डॉक्टर चेकअप में बताएंगे कि सर्विक्स खुलना शुरू हो गया है
👉 यह एक्टिव लेबर का संकेत है
🔹 6. बेचैनी और ऊर्जा में बदलाव
अचानक बहुत ज्यादा थकान या फिर अचानक एनर्जी आना (nesting instinct)
👉 शरीर डिलीवरी के लिए खुद को तैयार करता है
⚠️ कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
बहुत तेज और लगातार दर्द
ज्यादा ब्लीडिंग
पानी हरा या बदबूदार हो
बच्चे की मूवमेंट कम महसूस हो

rajendra bijarnia
5 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
3 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
4 Visualizações · 3 meses atrás

प्रेगनेंसी के दौरान कुछ सही आदतें अपनाने से मां और बच्चे दोनों की सेहत बेहतर रहती है। यहां 5 जरूरी काम दिए गए हैं जो हर गर्भवती महिला को जरूर करने चाहिए:
1. संतुलित और पौष्टिक आहार लें
फल, हरी सब्जियां, दूध, दही, प्रोटीन (दाल, अंडा) और सूखे मेवे जरूर शामिल करें। आयरन और कैल्शियम से भरपूर खाना बहुत जरूरी होता है।
2. नियमित डॉक्टर चेकअप कराएं
समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है ताकि बच्चे की ग्रोथ सही तरीके से हो रही है या नहीं, यह पता चलता रहे।
3. हल्की एक्सरसाइज करें
रोजाना हल्की वॉक या प्रेगनेंसी योग करने से शरीर एक्टिव रहता है और डिलीवरी भी आसान हो सकती है। (डॉक्टर की सलाह जरूर लें)
4. पर्याप्त नींद और आराम लें
कम से कम 7–8 घंटे की नींद लें और दिन में भी थोड़ा आराम करें। ज्यादा थकान से बचें।
5. तनाव से दूर रहें
खुश रहें, पॉजिटिव सोचें और मन को शांत रखें। ज्यादा तनाव का असर बच्चे पर भी पड़ सकता है।

rajendra bijarnia
4 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
4 Visualizações · 3 meses atrás

प्रेगनेंसी में संतरा (ऑरेंज) आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद होता है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में इसे नहीं या बहुत सावधानी से खाना चाहिए:
🚫 इन महिलाओं को संतरा नहीं खाना चाहिए:
1. एसिडिटी या गैस की समस्या ज्यादा हो
संतरा खट्टा होता है, जिससे हार्टबर्न, जलन और गैस बढ़ सकती है
अगर पहले से एसिडिटी रहती है, तो इससे परेशानी बढ़ सकती है
2. एलर्जी (Allergy) हो
कुछ महिलाओं को सिट्रस फलों (जैसे संतरा, नींबू) से एलर्जी होती है
लक्षण: खुजली, रैश, सूजन या सांस लेने में दिक्कत
3. शुगर (Gestational Diabetes) कंट्रोल में न हो
संतरे में नैचुरल शुगर होती है
अगर शुगर लेवल हाई रहता है, तो ज्यादा संतरा खाने से नुकसान हो सकता है
4. दांतों में संवेदनशीलता या दर्द हो
संतरे का एसिड दांतों की एनामेल को नुकसान पहुंचा सकता है
इससे दांतों में झनझनाहट बढ़ सकती है
5. डॉक्टर ने सिट्रस फल मना किया हो
कुछ खास मेडिकल कंडीशन में डॉक्टर खट्टे फल avoid करने को कहते हैं
✅ कब और कैसे खाएं (अगर कोई समस्या नहीं है):
दिन में 1 संतरा या 1 ग्लास फ्रेश जूस (बिना शक्कर)
खाली पेट न खाएं
खाने के बाद पानी से कुल्ला करें (दांतों की सुरक्षा के लिए)

rajendra bijarnia
5 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
5 Visualizações · 3 meses atrás

प्रेगनेंसी में केला (banana) आमतौर पर सुरक्षित और फायदेमंद फल है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में इसे खाने से बचना या सीमित करना बेहतर होता है:
🚫 कब केला नहीं खाना चाहिए:
1. अगर आपको सर्दी-खांसी या बलगम ज्यादा बनता है
केला ठंडी तासीर का माना जाता है, जिससे कुछ महिलाओं में कफ बढ़ सकता है।
2. अगर आपको डायबिटीज (Gestational Diabetes) है
केले में प्राकृतिक शुगर ज्यादा होती है, इसलिए शुगर लेवल बढ़ सकता है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेकर ही खाएं।
3. अगर पाचन कमजोर है या कब्ज/गैस की समस्या रहती है
कुछ लोगों में केला भारी लग सकता है और गैस या ब्लोटिंग बढ़ा सकता है।
4. रात के समय
रात में केला खाने से पाचन धीमा हो सकता है और कुछ मामलों में सर्दी या असहजता हो सकती है।
5. अगर आपको केला खाने से एलर्जी है
जैसे खुजली, सूजन या सांस लेने में दिक्कत हो—तो बिल्कुल न खाएं।
✅ कब और कैसे खाना बेहतर है:
सुबह या दिन में खाएं
पका हुआ (ripe) केला ही खाएं
1–2 केले रोज काफी होते हैं
दूध के साथ लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लें

rajendra bijarnia
8 Visualizações · 3 meses atrás

love song

rajendra bijarnia
5 Visualizações · 3 meses atrás

गर्भावस्था में हर माँ को यह जानने की उत्सुकता रहती है कि उसका बच्चा स्वस्थ है या नहीं। कुछ सामान्य संकेत ऐसे होते हैं जो बच्चे की अच्छी सेहत की ओर इशारा करते हैं:
1. बच्चे की हलचल (Baby Movements)
5वें महीने के बाद बच्चे की हलचल महसूस होना एक अच्छा संकेत है। अगर बच्चा नियमित रूप से हिल-डुल रहा है, तो यह उसकी एक्टिविटी और सेहत का संकेत है।
2. वजन का सही तरीके से बढ़ना
माँ का धीरे-धीरे वजन बढ़ना दिखाता है कि बच्चा ठीक से विकसित हो रहा है। अचानक बहुत ज्यादा या बिल्कुल भी वजन न बढ़ना चिंता का कारण हो सकता है।
3. अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामान्य होना
डॉक्टर द्वारा किए गए अल्ट्रासाउंड में बच्चे की ग्रोथ, हार्टबीट और पोजिशन सही होना एक मजबूत संकेत है कि बच्चा स्वस्थ है।
4. बच्चे की धड़कन (Heartbeat)
नियमित चेकअप में बच्चे की हार्टबीट सुनाई देना (लगभग 110–160 बीट प्रति मिनट) सामान्य और हेल्दी माना जाता है।
5. माँ का सामान्य स्वास्थ्य
अगर माँ को अत्यधिक दर्द, ब्लीडिंग या असामान्य लक्षण नहीं हैं और वह खुद को ठीक महसूस कर रही है, तो यह भी बच्चे के स्वस्थ होने का संकेत है।
⚠️ कब सावधान रहें?
बच्चे की हलचल अचानक कम हो जाए
तेज पेट दर्द या ब्लीडिंग हो
चक्कर, कमजोरी या हाई BP की समस्या हो
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

rajendra bijarnia
6 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
3 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
4 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
5 Visualizações · 3 meses atrás

Rajasthani writer

rajendra bijarnia
3 Visualizações · 3 meses atrás

[19/04, 20:40] Rajendra: बच्चे का वजन कितना है
[19/04, 20:41] Rajendra: बच्चे की पोजीशन क्या है
[19/04, 20:41] Rajendra: प्लेसेंटा की पोजीशन क्या है
[19/04, 20:41] Rajendra: बच्चे की धड़कन कितनी है
[19/04, 20:42] Rajendra: बच्चे के चारों और पानी कितना है है

Mostre mais