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जसाना पवन व्यास हत्याकांड: बरसों बाद भी इंसाफ का इंतजार, आखिर कब
नोहर (हनुमानगढ़):
हनुमानगढ़ जिले के जसाना गांव में हुआ बहुचर्चित 'पवन व्यास हत्याकांड' आज भी क्षेत्र के लोगों के दिलों में एक गहरा घाव बना हुआ है। साल 2017 में हुए इस जघन्य हत्याकांड को लंबा समय बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। इंसाफ की आस में पीड़ित परिवार और पूरा जसाना गांव आज भी व्यवस्था से यही सवाल पूछ रहा है—"आखिर पवन का असली कातिल कौन है और वह पुलिस की गिरफ्त से दूर क्यों है?"
क्या था पूरा मामला?
घटना 17 अक्टूबर 2017 की है। जसाना गांव के पंचायत भवन में ई-मित्र (Gramin Computer Seva Kendra) संचालक पवन व्यास की दिन-दहाड़े अज्ञात हमलावरों द्वारा धारदार हथियार से गला रेतकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। एक शांत और कर्मठ युवा की इस तरह हुई हत्या के बाद पूरे हनुमानगढ़ और नोहर क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था।
आंदोलन, पैदल यात्रा और चुनाव बहिष्कार
कातिलों की गिरफ्तारी न होने से नाराज ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने लंबे समय तक उग्र आंदोलन किए। न्याय की इस लड़ाई में कई बड़े मोड़ देखने को मिले:
171 दिनों का धरना: मृतक पवन व्यास के बुजुर्ग पिता रामस्वरूप व्यास ने न्याय की मांग को लेकर नोहर पुलिस थाने के सामने करीब 171 दिनों तक लंबा धरना दिया।
380 किलोमीटर की पैदल यात्रा: एक बेबस पिता अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए अपने गांव जसाना से राजधानी जयपुर तक करीब 380 किलोमीटर पैदल चलकर गए और विधानसभा के सामने गुहार लगाई।
मतदान का बहिष्कार: पुलिस की नाकामी और प्रशासन के ढुलमुल रवैये से नाराज होकर साल 2018 के विधानसभा चुनावों में जसाना और मोधुवाला के करीब 7,500 मतदाताओं ने वोट न डालकर चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया था। इसके बाद के चुनावों में भी परिवार और ग्रामीणों द्वारा भारी नाराजगी जताई गई।
जांच में क्यों रही नाकामी?
शुरुआती दौर में स्थानीय पुलिस की तफ्तीश पर ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों (जैसे विप्र फाउंडेशन) ने गंभीर सवाल उठाए थे। आरोप लगे कि शुरुआती जांच को सही तरीके से नहीं संभाला गया, जिससे सबूतों के साथ खिलवाड़ हुआ। जनता के भारी दबाव को देखते हुए बाद में इस केस की जांच SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) को सौंपी गई और बीकानेर आईजी द्वारा 18 सदस्यीय विशेष टीम भी गठित की गई।
विधानसभा में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और पुख्ता कड़ियों के अभाव में एजेंसियां आज तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकीं।
आज की स्थिति: अनसुलझी पहेली
वर्तमान में भी यह केस राजस्थान पुलिस के अनसुलझे मामलों (Unsolved Crime Cases) की सूची में दर्ज है। समय बीतने के साथ फाइलें भले ही ठंडी पड़ गई हों, लेकिन जसाना की जनता और पीड़ित परिवार की आंखें आज भी इंसाफ की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठी हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पवन के हत्यारे सलाखों के पीछे नहीं पहुंच जाते, तब तक कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बहाल होना नामुमकिन है।