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“जब द्वारका ने ली चैन की साँस!
युद्ध के बाद श्रीकृष्ण का दिव्य आगमन | विरह, भक्ति और प्रेम की

0 مناظر· 07/02/26
Dharm Yug
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कुरुक्षेत्र का महासंग्राम समाप्त हो चुका है…
धर्म की विजय हो गई है…
लेकिन द्वारका अभी भी बेचैन है… क्योंकि उसका प्राण—श्रीकृष्ण—अभी लौटा नहीं है।
यह कथा है उस पल की,
जब शंखनाद गूंजता है…
आकाश पुष्पवर्षा करता है…
और द्वारका की गलियों में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का मंगल प्रवेश होता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण प्रथम स्कंध का एकादश अध्याय
हमें दिखाता है— 🔹 भक्तों की उत्कट प्रतीक्षा
🔹 द्वारका की स्त्रियों का हृदय-विदारक विरह
🔹 भगवान की एक मुस्कान से मिटता सारा दुख
🔹 और वह प्रेम, जो शब्दों से परे है
यह केवल कथा नहीं…
यह भक्ति का अनुभव है।
यह अध्याय बताता है कि भगवान जहाँ होते हैं, वहाँ जीवन उत्सव बन जाता है।
📖 इस कथा में आप जानेंगे— ✔ द्वारका के लोग श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा कैसे करते हैं
✔ भगवान के रथ का दिव्य वर्णन
✔ भक्तों के नेत्रों से बहता प्रेम
✔ श्रीकृष्ण का लोकमंगल स्वरूप
यदि आप कृष्ण-भक्ति, भागवत कथा और आध्यात्मिक शांति की खोज में हैं,
तो यह कथा आपके हृदय को छू जाएगी।
🙏 कथा सुनिए…
🙏 अनुभव कीजिए…
🙏 और श्रीकृष्ण को अपने जीवन में प्रवेश करने दीजिए…
जय श्रीकृष्ण | जय द्वारकाधीश 🌸

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