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Title, thumbnail ya video me agar abusing, adult ya sexually explicit content paya gaya to channel bina kisi warning ke permanent delete kar diya jayega. Yeh rule turant lagu hai. Ab tak 350+ channels delete kiye ja chuke hain. Kripya kisi bhi prakar ka adult ya abusive content upload na karein. Rule violate hone par channel bina bataye delete ho jayega.


— Team ApnaTube

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shyam_diwana

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⁣इस डांस में दिखाई दिये नए-नए चेहरे 😱 डांस ने सभी का दिल मोह लिया #popular #viraldance #funny 😱🙏🤔🤣

Anshika vlogs

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राधा रानी जी की सुबह की आरती और दर्शन अत्यंत पवित्र और मन को शांति देने वाले होते हैं। प्रातःकाल मंदिर के कपाट खुलते ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। शंख, घंटा और भजनों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। राधारानी जी को सुंदर वस्त्र, फूलों और आभूषणों से सजाया जाता है। दीपों की उज्ज्वल ज्योति में उनका दिव्य स्वरूप और भी मनमोहक दिखाई देता है। भक्त श्रद्धा और प्रेम से आरती में भाग लेकर उनके चरणों में शीश झुकाते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Laxminarayan

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।। *ओ३म्* ।। 🙏सादर नमस्ते जी।¶• *जैसे हाथ आदि अवयवों के बिना परमेश्वर ने सब जगत् को रचा है वैसे ही वेदों को भी सब साधनों के बिना रचा है क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान् है। सृष्टि के प्रारंभ में अग्नि, वायु आदित्य और अंगिरा इन चार ऋषियों के ज्ञान के बीच में अपनी वेदविद्या को प्रेरित करके उनके द्वारा ईश्वर ने वेद प्रकाशित किए।* * *टिप्पणी:-* जैसे मनुष्य मुख आदि साधनों से शब्दों का उच्चारण करते हैं वैसे ही परमेश्वर ने अपने अनंत सामर्थ्य से कार्यशब्दरूपी वेद का उच्चारण करके सृष्टि के प्रारंभ में चार ऋषियों के अंतःकरण में प्रेषित किया। ईश्वर को मनुष्यों के समान मुख प्राणादि साधनों की आवश्यकता उच्चारण के लिए नहीं होती। शब्द दो प्रकार के बताए गए हैं एक नित्य और दूसरे कार्य। नित्य शब्दरूपी वेद ईश्वर के ज्ञान में सदा रहते हैं। कार्य शब्दरूपी वेद प्रलय के समय नहीं रहते। ¶• *ईश्वर में पक्षपात का लेश भी नहीं है। सृष्टि के प्रारंभ में चार पुरुषों को जो वेदों का ज्ञान ईश्वर ने दिया उससे न्यायकारी ईश्वर का साक्षात् न्याय ही प्रकाशित होता है क्योंकि उन्हीं चार पुरुषों का ऐसा पूर्व पुण्य था कि उनके हृदय में उसने वेदों को प्रकाशित किया।* (ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका वेदोत्पत्तिविषय)प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शनयोग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड

दीपक००० दीपक०००

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