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Title, thumbnail ya video me agar abusing, adult ya sexually explicit content paya gaya to channel bina kisi warning ke permanent delete kar diya jayega. Yeh rule turant lagu hai. Ab tak 350+ channels delete kiye ja chuke hain. Kripya kisi bhi prakar ka adult ya abusive content upload na karein. Rule violate hone par channel bina bataye delete ho jayega.


— Team ApnaTube

Kratke hlače Stvoriti

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Adv_Ajmelsinh_chauhan

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Kumar Vishwas dosti shayari

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Kitna badhiya dance Hai yah video aap sabhi log dekh Kar hamare channel ko like aur subscribe kar dena

vs430

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# motivation video most viral

Abhay

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बिलकुल! ये रही एक दिलचस्प और प्रेरणादायक कहानी — "किसान और ज़मींदार":

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कहानी: किसान की समझदारी और ज़मींदार का घमंड

एक गाँव में हरिया नाम का एक मेहनती किसान रहता था। उसके पास थोड़ी सी ज़मीन थी, लेकिन वह दिन-रात मेहनत करता और अपने परिवार का पेट पालता। वहीं, उसी गाँव में एक बड़ा ज़मींदार भी रहता था — ठाकुर साहब। उनके पास सैकड़ों बीघा ज़मीन थी, नौकर-चाकर थे, लेकिन उन्हें कभी संतोष नहीं था।

एक बार गाँव में सूखा पड़ गया। बारिश नहीं हुई, खेत सूख गए। ज़्यादातर किसान परेशान हो गए, लेकिन हरिया के खेत में फिर भी कुछ फसल उग आई। सब हैरान थे कि जब बाकी खेत सूखे पड़े हैं, तब हरिया के खेत में हरियाली कैसे?

ठाकुर साहब ने हरिया को बुलवाया और पूछा, "तेरे खेत में फसल कैसे हुई, जब बाकी सबके खेत सूखे हैं?"

हरिया ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "मालिक, मैंने समय पर हल चलाया, गोबर की खाद डाली और कुएँ से पानी सींचा। भगवान पर भरोसा किया, लेकिन मेहनत करना नहीं छोड़ा।"

ठाकुर साहब को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने सोचा कि सिर्फ ज़मीन का मालिक होना ही काफी नहीं, मेहनत करना भी ज़रूरी है।

उस दिन के बाद से ठाकुर साहब ने किसानों की मदद करना शुरू किया और गाँव में एकता और खुशहाली लौट आई।

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सीख:
धन और ज़मीन से बड़ा होता है परिश्रम और समझदारी। मेहनत करने वाला ही असली राजा होता है।

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अगर आप चाहें तो मैं इस कहानी को और विस्तार दे सकता हूँ या किसी और अंदाज़ में लिख सकता हूँ — जैसे हास्य, रहस्य, या बच्चों के लिए। बताइए, अगली कहानी किस विषय पर हो?

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23 जनवरी 1897 को जन्मे सुभाष बाबू पढ़ाई में इतने तेज़ थे कि उन्होंने ICS जैसी बड़ी नौकरी पाई,
लेकिन उन्होंने कहा —
‘मैं अंग्रेज़ों की नौकरी नहीं, भारत की आज़ादी चुनता हूँ।’
जहाँ कुछ लोग समझौते की बात कर रहे थे,
वहीं नेताजी ने कहा —
‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।’
उन्होंने बनाई आज़ाद हिंद फौज,
और दिया वो नारा जो आज हर भारतीय की पहचान है —
‘जय हिंद!’

Aditya

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