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Magh Mela 2026 : में लोक और शास्त्रीय कलाओं का संगम कला संगम ने बांधा संस्कृति समा ..

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Magh Mela 2026 : प्रयागराज माघ मेले में लोक और शास्त्रीय कलाओं का संगम, कला संगम ने बांधा सांस्कृतिक समां
प्रयागराज माघ मेले में आस्था के साथ संस्कृति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उत्..

Magh Mela 2026 : प्रयागराज माघ मेले में लोक और शास्त्रीय कलाओं का संगम, कला संगम ने बांधा सांस्कृतिक समां

प्रयागराज माघ मेले में आस्था के साथ संस्कृति और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘कला संगम’ कार्यक्रम की शुरुआत शास्त्रीय और लोक कलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने श्रद्धालुओं और दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

Magh Mela Witnesses Cultural Confluence: प्रयागराज के पावन संगम तट पर लगने वाला माघ मेला केवल आस्था और स्नान का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं का जीवंत उत्सव भी है। इसी भाव को साकार करता हुआ माघ मेला क्षेत्र में ‘कला संगम’ सांस्कृतिक कार्यक्रम शनिवार से भव्य रूप से आरंभ हो गया। उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शास्त्रीय और लोक संगीत, नृत्य व गायन की त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है, जिसने मेला क्षेत्र को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया है

माघ मेला क्षेत्र के परेड ग्राउंड में आयोजित कला संगम कार्यक्रम का उद्देश्य देश की समृद्ध लोक एवं शास्त्रीय कलाओं को जन-जन तक पहुंचाना है। इस आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जहां एक ओर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो रहा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय संस्कृति की विविधता और कलात्मक ऊंचाइयों से भी वे रूबरू हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग की इस पहल को माघ मेले की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

4 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगा कला संगम

माघ मेला अधिकारी ऋषिराज ने बताया कि कला संगम कार्यक्रम 4 जनवरी से 30 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें कुल 20 दिनों तक 120 से अधिक लोक एवं शास्त्रीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस दौरान प्रतिदिन संगीत, नृत्य और लोक कलाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे माघ मेला क्षेत्र लगातार सांस्कृतिक गतिविधियों से गुलजार रहेगा। उन्होंने कहा कि माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का भी मंच है। कला संगम के माध्यम से हम प्रदेश और देश के श्रेष्ठ कलाकारों को श्रद्धालुओं के बीच प्रस्तुत कर रहे हैं।”

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