Geeta ji
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Geeta ji
9 Tampilan · 25 hari yang lalu

⁣इस वीडियो में प्रस्तुत है श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 का श्लोक 19, शुद्ध संस्कृत उच्चारण और सरल हिंदी अर्थ के साथ।
इस श्लोक में शंखों की गूंज से कौरव पक्ष के हृदय में भय उत्पन्न होने का वर्णन है। यह श्लोक दर्शाता है कि पांडवों की ध्वनि ने युद्धभूमि में गहरा प्रभाव डाला और वातावरण को आंदोलित कर दिया।
यदि आप भगवद्गीता के श्लोक अर्थ सहित, गीता ज्ञान, संस्कृत श्लोक हिंदी में, और श्रीकृष्ण के दिव्य उपदेश जानना चाहते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए उपयोगी है।
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Geeta ji
24 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣इस वीडियो में हम प्रस्तुत कर रहे हैं श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 का श्लोक 13, शुद्ध संस्कृत उच्चारण और सरल हिंदी अर्थ के साथ।
इस श्लोक में शंख, नगाड़े और अन्य वाद्यों की ध्वनि से कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि गूंज उठती है, जो युद्ध के आरंभ का संकेत देती है। यह श्लोक महाभारत के वातावरण को जीवंत रूप में दर्शाता है।

अगर आप भगवद्गीता के श्लोक अर्थ सहित, गीता ज्ञान, संस्कृत श्लोक हिंदी में, और श्रीकृष्ण के उपदेश सीखना चाहते हैं, तो यह चैनल आपके लिए है।
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Geeta ji
12 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣गीता का बारहवाँ श्लोक
हमें यह दिखाता है कि
नेतृत्व केवल पद से नहीं, ध्वनि से भी जाग्रत होता है।

भीष्म पितामह, जो कौरवों के वरिष्ठ योद्धा हैं,
दुर्योधन का उत्साह बढ़ाने के लिए
अपना शंख बजाते हैं।

यह शंखनाद केवल युद्ध की घोषणा नहीं,
बल्कि भीतर सोई हुई शक्ति को जगाने का संकेत है।

यह श्लोक हमें सिखाता है कि
जब जीवन में डर और भ्रम छा जाए,
तो किसी एक साहसी आवाज़ की ज़रूरत होती है
जो पूरे वातावरण को बदल दे।

हमारे जीवन में भी
कभी-कभी हमें स्वयं अपना शंख बजाना पड़ता है —
अपने आत्मविश्वास, साहस और धर्म को जगाने के लिए।

गीता का यह श्लोक
हमें याद दिलाता है —

जब भीतर संकल्प जागता है,
तभी बाहर परिवर्तन शुरू होता है।

अगर आप जीवन में
हिम्मत और आत्मबल की तलाश में हैं,
तो यह श्लोक आपके लिए है। 🌿

🙏 धन्यवाद —
गीता को सुनने के लिए नहीं,
अपने भीतर उतारने के लिए।

Geeta ji
6 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣इस वीडियो में प्रस्तुत है श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय (अर्जुन विषाद योग) का ग्यारहवाँ श्लोक।
इस श्लोक में दुर्योधन अपने योद्धाओं को भीष्म पितामह की रक्षा करने का आदेश देता है।

यह श्लोक दर्शाता है कि
👉 अधर्म के पक्ष में खड़ा व्यक्ति भीतर से असुरक्षित रहता है,
👉 इसलिए वह बार-बार आदेश और रणनीति बदलता रहता है।

🔹 अध्याय: 1 (अर्जुन विषाद योग)
🔹 श्लोक: 11
🔹 मुख्य पात्र: दुर्योधन, भीष्म पितामह
🔹 स्थान: धर्मभूमि कुरुक्षेत्र

गीता का यह श्लोक आज के जीवन में भी हमें सिखाता है कि
जहाँ विश्वास नहीं, वहाँ भय और नियंत्रण होता है।

🙏 गीता के दिव्य ज्ञान से जुड़ने के लिए वीडियो को Like करें, Share करें और Channel Subscribe करें।

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