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Rajesh kumar
10 विचारों · 16 दिन पहले

विजय बोले धीमे-धीमे,
“सरोज तू मेरी रानी…”
थारे बिना अधूरी लागे,
हर एक मेरी कहानी।
घूंघट में चाँद शरमायो,
सेहरे में नूर समायो।
आज दो दिल एक हुए हैं,
रिश्तो रब ने निभायो।