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0 Tampilan · 23 hari yang lalu

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⁣not letting go
#NeverLettingGo
⁣keep your value high

prabinyo
0 Tampilan · 19 hari yang lalu

⁣छोटा हो या बड़ा… मदद का दिल सबसे बड़ा होता है।

hk0786
0 Tampilan · 23 hari yang lalu

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0 Tampilan · 23 hari yang lalu

⁣find 22 dancing girl 😍🥰

prabinyo
0 Tampilan · 17 hari yang lalu

⁣जो भलाई बाँटता है… वही सच्चा अमीर होता है।

Tomo04
0 Tampilan · 23 hari yang lalu

Prison escape journey gaming part 2

Watch the complete gameplay of "Prison Escape Simulator 3D" from start to final escape! 🚔🔓 See how I managed to break out of prison.

#PrisonEscapeSimulator3D #PrisonEscape #MobileGames

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prabinyo
0 Tampilan · 14 hari yang lalu

⁣भलाई छोटी हो या बड़ी, दिल बड़ा कर देती है।

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0 Tampilan · 23 hari yang lalu

p Santosh

⁣राधा, सीता और पार्वती — तीनों की माताओं का गुप्त रहस्य | ShivMahapuran ParvatiKhand Ch:2 #shivaparvati #shiv #shiva #shivshankar मित्रो — आज मैं आपके लिए एक अद्भुत, रहस्यमय और अत्यंत दिव्य कथा लेकर आया हूँ, जो सीधे जुड़ी है भगवान शिव, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से।

अक्सर आपने सुना होगा — कुछ लोग कहते हैं कि राधारानी का वर्णन कहीं नहीं मिलता, यह केवल एक लोककथा या दंतकथा हैं। परन्तु, ऐसा बिल्कुल नहीं है!

राधाजी का उल्लेख, उनका स्वरूप, उनकी भक्ति और उनकी महिमा — स्वयं शिवमहापुराण में विस्तारपूर्वक वर्णित है।

तो आइए, श्रद्धा और प्रेम के साथ, इस अद्भुत कथा का आरंभ करते हैं… मित्रो,

यह है “मेना, धन्या और कलावती” तीन दिव्य कन्याओं की कथा — जो शिव पुराण (रुद्र संहिता – पार्वती खंड के दूसरे अध्याय ) में वर्णित है।


आज हम जानेंगे एक अत्यंत अद्भुत और दुर्लभ कथा — तीन दिव्य बहनों की कहानी, जिनका संबंध स्वयं देवी पार्वती, माता सीता और राधा रानी से जुड़ा हुआ है।
ये हैं — मेना, धन्या और कलावती।
आइए, शुरू करते हैं यह रहस्यमयी कथा, जो शिवपुराण में वर्णित है।

एक समय की बात है —
प्रजापति दक्ष की अनेक कन्याएँ थीं। उन्हीं में से एक कन्या थीं स्वधा, जिन्हें उनके पिता ने पितरों को दान में दे दिया था।
स्वधा बड़ी पतिव्रता और धर्मनिष्ठा थीं। पितरों की सेवा में सदैव लगी रहतीं।

उनकी भक्ति और तप से प्रसन्न होकर पितरों ने उन्हें आशीर्वाद दिया —
“हे स्वधा! तुम्हारे तप और सेवा से हम अत्यंत प्रसन्न हैं। तुम्हें तीन दिव्य पुत्रियाँ प्राप्त होंगी, जो देवियों के समान तेजस्विनी होंगी।”

और तभी स्वधा से तीन अद्भुत कन्याएँ उत्पन्न हुईं —
मेना, धन्या, और कलावती।

ये तीनों कन्याएँ किसी साधारण माता-पिता की संतान नहीं थीं — ये मनस-पुत्रियाँ थीं, अर्थात् योगबल और दिव्य संकल्प से उत्पन्न हुई थी ।
तीनों में अद्भुत सौंदर्य, तेज और आध्यात्मिक शक्ति थी।

समय बीता।
तीनों बहनों को एक दिन यह इच्छा हुई कि वे श्वेतद्वीप जाएँ — वह स्थान जहाँ भगवान विष्णु स्वयं अपने शुद्ध स्वरूप में निवास करते हैं।

वे वहाँ पहुँचीं और उन्होंने भगवान विष्णु को प्रणाम किया।
उसी समय वहाँ सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार जैसे ब्रह्मर्षि भी उपस्थित थे — जो सदैव ध्यानमग्न रहते हैं।

सभी देवता और दिव्य स्त्रियाँ उन मुनियों के सम्मान में खड़ी हो गईं,
किन्तु मेना, धन्या और कलावती — किसी अज्ञात कारण से — वहीं बैठी रहीं।

यह अ-सम्मान देखकर मुनियों के मुख पर कठोरता छा गई।

मुनियों ने कहा —
“तुम्हें अहंकार है अपने सौंदर्य और तेज का!
हे कन्याओ! तुम दिव्य लोक में रहकर भी मर्यादा भूल गईं।
अतः अब तुम्हें स्वर्गलोक से पतित होकर पृथ्वी पर मानव रूप में जन्म लेना होगा!”

तीनों बहनें भयभीत होकर मुनियों के चरणों में गिर पड़ीं —
“भगवन्! यदि हमसे कोई भूल हो गई है, तो क्षमा करें। हम तो अनजाने में यह अपराध कर बैठीं।”

तब उन सनकादि मुनियों का हृदय पिघल गया।
उन्होंने कहा —
“हे कन्याओ! यद्यपि हमारा वचन झूठा नहीं हो सकता,
पर हमारा श्राप ही तुम्हारे लिए वरदान बन जाएगा।”

उन्होंने तीनों को आशीर्वाद दिया —

मेना — “तुम पृथ्वी पर हिमवान पर्वतराज की पत्नी बनोगी।
तुम्हारे गर्भ से स्वयं देवी पार्वती का जन्म होगा,
जो शिवशक्ति स्वरूपा होंगी।”

धन्या — “तुम राजा जनक की पत्नी बनोगी,
और तुम्हारे गर्भ से सीता उत्पन्न होंगी — जो स्वयं लक्ष्मी का अवतार होंगी।”

कलावती — “तुम वृषभानु गोप की पत्नी बनोगी,
और तुम्हारी पुत्री होगी राधा रानी,
जो श्रीकृष्ण की हृदयस्वरूपा कहलाएगी।”
तो मित्रो यहाँ हमे राधाजी के माता कलावती का वर्णन मिलता है... आज के बाद यदि कोई राधाजी के बारे में संदेह व्यक्त करे तो शिव महापुराण को कोट कीजिएगा......आगे कथा में .....

समय आने पर तीनों बहनें मानव रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुईं —
मेना ने हिमालयराज हिमवान से विवाह किया और पार्वती की जननी बनीं।
धन्या ने राजा जनक से विवाह किया और सीता माता को जन्म दिया।
कलावती ने वृषभानु गोप से विवाह किया और राधा रानी की जननी बनीं।

इस प्रकार तीनों दिव्य बहनों ने तीनों युगों में तीन स्वरूपों में —
शक्ति, भक्ति और प्रेम के स्तंभों को स्थिर किया।

मित्रो,
यह कथा केवल तीन स्त्रियों की नहीं, बल्कि तीन आदर्शों की कथा है —

मेना – तप और शक्ति की प्रतीक।

धन्या – त्याग और मर्यादा की प्रतीक।

कलावती – प्रेम और माधुर्य की प्रतीक।

शिवपुराण हमें यह सिखाता है कि जब किसी का कर्म और हृदय पवित्र हो,
तो श्राप भी वरदान बन जाता है।
कथा का सार...

स्वधा से तीन कन्याएँ उत्पन्न हुईं — मेना, धन्या, कलावती।
मुनियों के श्राप से वे पृथ्वी पर जन्मीं।
मेना बनीं पार्वती की माता, धन्या बनीं सीता की माता, कलावती बनीं राधा की माता।
तीनों ने क्रमशः शक्ति, त्याग और प्रेम की परंपरा को पृथ्वी पर स्थिर किया।

मित्रो,
यह थी मेना, धन्या और कलावती की रहस्यमयी कथा —
जहाँ श्राप भी वरदान बन गया, और मातृत्व ने तीनों लोकों को दिव्यता से भर दिया।

यदि कथा ठीक लगे तो शेयर कीजिए.......

जय माँ पार्वती!
जय शिव शंकर!
🔱 हर हर महादेव!

sachin chauhan
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Leh

sachin chauhan
0 Tampilan · 23 hari yang lalu

⁣Enjoying Leh Roads

..

Manish Kumar
0 Tampilan · 23 hari yang lalu

..

Zubair Saifi Z
0 Tampilan · 24 hari yang lalu

ram🙏🙏

Rohit Choudhary
0 Tampilan · 24 hari yang lalu

⁣11th Biology Chapter 1 जीवन_का_पुस्तकालय

Rohit Choudhary
0 Tampilan · 24 hari yang lalu

⁣11th Biology Chapter 2 जीवन_का_पुस्तकालय

Rohit Choudhary
0 Tampilan · 24 hari yang lalu

⁣11th Biology Chapter 5 फूल_का_गुप्त_ब्लूप्रिंट

Rohit Choudhary
0 Tampilan · 24 hari yang lalu

⁣11th Biology Chapter 7 मेंढक__एक_उभयचर_सर्वाइवल_मशीन

⁣Rashtravaadi SanatanBharat में आपका स्वागत है !
@Ramabhajan
हम सनातनी ऋषियों की संतान है। नारायण के आत्मज ब्रह्माजी के मानसिक पुत्र मरीचि हुए, मरीचि के पुत्र कश्यप हुए जिन्होंने प्रजापति के १२ कन्याओं से विवाह कर अनेक तेजश्वी पुत्र उत्पन्न किए। उन १२ कन्याओं में मुख्य अदिति ने विवस्वान (सूर्य) को जन्म दिया। सूर्य के पुत्र मनु हुए जिनकी कन्या इला ने बुध से विवाह किया और पुरुरवा को जन्म दिया। बुध के पिता बृहस्पति हुए, जो अंगिरा के पुत्र हुए और अंगिरा ब्रह्मा के पुत्र हुए। इस तरह से हम ययाति के पुत्र यदु (यदु वंश), पुरु (कुरुवश), तुवर्सु (यवन) , द्रुहु (भोजवंशी) , अणु (मलेच्छ) यही सारी मानवता के जनक हुए। सम्पूर्ण संसार सनातन से ही उत्पन्न हुआ है और मुझे गर्व है हम ऋषियों की संतान है। सनातन ही जगत का आधार है।
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