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Kratke hlače Stvoriti

27 जुलाई 2026, सोमवार का संपूर्ण और सटीक दैनिक पंचांग। जानिए आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि (सोम प्रदोष व्रत), मूल नक्षत्र और वैधृति योग के साथ सभी नौ ग्रहों की गोचर स्थिति (Graha Gochar) कैसी रहेगी। सोमवार और प्रदोष व्रत के इस अत्यंत शुभ संयोग पर भगवान शिव का पूजन समय और प्रभाव यहाँ देखें।
📌 वीडियो के मुख्य बिंदु (Video Highlights)
0:00 - आज का विशेष पंचांग (Aaj Ka Panchang)
0:42 - त्रयोदशी तिथि (सोम प्रदोष व्रत) और मूल नक्षत्र का समय (Tithi & Nakshatra Timings)
1:20 - वैधृति योग और तैतुल-गर करण (Yoga & Karan Details)
2:10 - धनु राशि में चंद्रमा और सोमवार प्रदोष का महत्व (Planet Transits & Puja Muhurat Today)
💡 आज की ज्योतिषीय जानकारी (Panchang Details)
दिनांक: 27 जुलाई 2026, सोमवार (Somwar)
पक्ष & तिथि: शुक्ल पक्ष, त्रयोदशी (शाम 16:14:16 तक, इसके बाद चतुर्दशी तिथि) - सोम प्रदोष व्रत
नक्षत्र: मूल (सुबह 10:27:33 तक, इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा)
योग: वैधृति (रात्रि 22:53:41 तक, इसके बाद विष्कम्भ योग)
करण: तैतुल (शाम 16:14:16 तक), इसके बाद गर करण (रात्रि 29:18:16* तक)
विशेष गोचर: चंद्रमा आज पूरे दिन बृहस्पति की राशि धनु में गोचर करेंगे। सोमवार और त्रयोदशी तिथि का मिलन सोम प्रदोष व्रत का निर्माण करता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए अत्यंत फलदायी है।
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Disclaimer: यह गणना पारंपरिक वैदिक ज्योतिषीय सिद्धांतों पर आधारित है। अपनी व्यक्तिगत कुंडली के सटीक विश्लेषण के लिए विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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Jagatkasaar

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🔱 #अविनाशी_महादेव: #अनंत_कोटि_ब्रह्मांड_नायक_शिवलिंग_महा_महिमा 🌌✨
१. आदि और अंत से परे: लिंगोद्भव का परम रहस्य 🌋🕉️
सृष्टि के प्रारंभ में जब ब्रह्मा 🪷 और विष्णु 🪘 के मध्य श्रेष्ठता का महा-विवाद उत्पन्न हुआ, तब उस असीम अंधकारमय शून्य में एक ऐसा दिव्य प्रकाशपुंज प्रकट हुआ, जिसका न कोई आदि था और न कोई अंत। वह था साक्षात अग्नि लिंग! 🔥✨
#ब्रह्मा_जी हंस 🦢 का रूप धरकर आकाश की ओर अनंत ऊंचाइयों तक उड़ चले कि उसका ऊपरी छोर ढूंढ सकें। 🌌
#विष्णु_जी वराह 🐗 का रूप धारण कर पाताल की अंतहीन गहराइयों में उतर गए कि उसका आधार ढूंढ सकें। 🌊
युग बीत गए, कल्प बीत गए, परंतु न ब्रह्मा को उस ज्योतिस्तंभ का शीर्ष मिला और न विष्णु को उसका छोर! ⏳❌
यह शिवलिंग कोई साधारण पाषाण या आकृति नहीं है; यह स्वयं #परब्रह्म का साक्षात स्वरूप है, जो दिशाओं, समय, और ब्रह्मांड की सीमाओं से परे है। 🪐✨ यह इस बात का अकाट्य प्रमाण है कि महादेव ही आदि हैं, महादेव ही मध्य हैं, और महादेव ही अनंत अंत हैं! 🕉️♾️
२. 'शिवलिंग' शब्द का वास्तविक और गूढ़ अर्थ 📜🧘‍♂️
संस्कृत व्याकरण और परम पवित्र वेदों के अनुसार 'लिंग' शब्द का वास्तविक अर्थ होता है "चिन्ह" या "प्रतीक"। 🏷️ शिवलिंग का सीधा अर्थ है—'शिव का परम पवित्र प्रतीक'। 🔱लयनात् लिंगमुच्यते" 🌟
अर्थात, जिसके भीतर संपूर्ण चराचर जगत उत्पन्न होता है और अंत समय में जिसके भीतर सब कुछ विलीन (लय) हो जाता है, वही लिंग है! 🌀🌌
यह दृश्यमान जगत, यह नीला आकाश 🌌, ये टिमटिमाते अनगिनत तारे ⭐, सौरमंडल 🪐, और वे गुप्त आयाम (Dimensions) जिन्हें आधुनिक विज्ञान आज तक नहीं छू सका—ये सब शिवलिंग के ही भीतर स्पंदित हो रहे हैं। 🧬 शिवलिंग ब्रह्मांडीय ऊर्जा (#cosmic_energy) का वो न्यूक्लियस (केंद्र) है, जहां से जीवन का सृजन होता है और जहां महाविनाश के बाद सब शांत हो जाता है। 🌪️🔇
३. शिवलिंग की त्रिगुणात्मक संरचना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण 🔬🔱
एक पूर्ण शिवलिंग केवल एक पिंडी नहीं है, यह पूरी सृष्टि के त्रिमूर्ति स्वरूप और ब्रह्मांड की वैज्ञानिक बनावट को दर्शाता है। 🌌 यदि आप ध्यान से देखें, तो इसके तीन मुख्य भाग होते हैं:
जलहरी से निरंतर बहने वाला जल 💧 इस बात का जीवंत प्रतीक है कि प्रकृति 🍂 और पुरुष 🌀, शक्ति 🛕 और शिव 🔱 कभी एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। बिना शक्ति के शिव 'शव' समान हैं, और बिना शिव के शक्ति सर्वथा निराधार है। ☯️✨
४. महाकाल का दिव्य ध्यान: रूप और अरूप का महा-मिलन 🏔️🧘‍♂️
सोचिए उस परम स्वरूप के बारे में, जो भस्म रमाए 💀, जटाजूट फैलाए 🌪️, गले में वासुकि नाग 🐍 को धारण किए, बाघंबर ओढ़े 🐅 हिमालय के सर्वोच्च शिखर कैलाश 🏔️ पर गहरे ध्यान में मग्न हैं:
#गंगा_की_धारा: 🌊 उनकी जटाओं से बहती पावन गंगा केवल जल नहीं, बल्कि ज्ञान और पवित्रता की वो अविरल धारा है जो मानव चेतना को शुद्ध करती है। 🧠✨
#तीसरा_नेत्र: 👁️‍🗨️ उनका तीसरा नेत्र जब खुलता है, तो भ्रम, अज्ञान, वासना और अंधकार का समूल विनाश होता है। यह अंतर्दृष्टि का प्रतीक है। 🔥
#विष_और_चंद्रमा: 🧪🌙 जिन्होंने संसार को विनाश से बचाने के लिए हलाहल विष अपने कंठ में धारण कर लिया और #नीलकंठ कहलाए, वही अपने मस्तक पर शीतल चंद्रमा को भी स्थान देते हैं। वे विष (बुराई) को समाज में फैलने नहीं देते और शीतलता (शांति) को हमेशा शीर्ष पर रखते हैं। 🕊️
जब यही साकार रूप निराकार में बदलता है, तो वह शिवलिंग बन जाता है। 🌌 मूर्ति पूजा की एक सीमा होती है, रूप की एक सीमा होती है, लेकिन शिवलिंग की कोई सीमा नहीं है। ♾️ यह निराकार ईश्वर को साकार रूप में पूजने का ब्रह्मांड का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। 🕋🔱
५. द्वादश ज्योतिर्लिंग: दिव्य चेतना के बारह महास्त्रोत 🗺️⚡
भारत की इस पवित्र भूमि पर महादेव ने स्वयं को बारह ज्योतिर्लिंगों के रूप में स्थापित किया है। 🪐 ये केवल मंदिर नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी के वे महा-ऊर्जा केंद्र हैं जहां महादेव की जीवंत ऊर्जा आज भी धड़कती है:
१. #सोमनाथ: 🌙 सौराष्ट्र में, जो चंद्रमा के कष्टों और रोगों को हरने वाले हैं।
२. #मल्लिकार्जुन: 🏔️ श्रीशैल पर्वत पर, जहां कार्तिकेय के प्रेम में शिव और शक्ति का अटूट मिलन है।
३. #महाकालेश्वर: 💀 उज्जैन के राजा, जो काल के भी काल हैं, जिनकी भस्म आरती साक्षात मृत्यु को भी डरा देती है!
४. #ओंकारेश्वर: 📿 नर्मदा तट पर, जहां साक्षात 'ॐ' का दिव्य आकार भूमि पर उतरा है।
५. #केदारनाथ: ❄️ हिमालय की पावन गोद में, जहां भयंकर बर्फ के बीच महादेव रक्षक बनकर विराजमान हैं।
६. #भीमाशंकर: ⚡ डाकिनी में, जो असुरों का नाश करने वाले महाबलशाली स्वरूप हैं।
७. #काशी_विश्वनाथ: 🛕 बनारस में, जो काल के त्रिशूल पर टिकी अविनाशी नगरी के परम स्वामी हैं।
८. #त्र्यंबकेश्वर: 🌊 नासिक में, जहां से गोदावरी का उद्गम होता है और ब्रह्मा-विष्णु-महेश एक साथ वास करते हैं।
९. #वैद्यनाथ: 🩺 चिताभूमि में, जो संसार के सभी मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रोगों के सर्वोच्च वैद्य हैं।
१०. #नागेश्वर: 🐍 दारुकावन में, जो विषैले सर्पों और संकटों के देव हैं।
११. #रामेश्वरम: 🌊 दक्षिण के विशाल समुद्र तट पर, जिनकी स्थापना स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने अपने हाथों से की थी।
१२. #घृष्णेश्वर: 🕉️ एलोरा के समीप, जो अपने अनन्य भक्तों के मान की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहते हैं।
६. महामृत्युंजय और परम मोक्ष के दाता 🕉️🕊️
शिवलिंग की पूजा का अंतिम लक्ष्य केवल सांसारिक सुख पाना नहीं है। महादेव तो 'आशुतोष' हैं, वे एक लोटा जल और दो बेलपत्र से भी तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। परंतु उनका वास्तविक और सर्वोच्च आशीर्वाद है—#मोक्ष! 🕊️
जब कोई भक्त शिवलिंग के सामने बैठकर शांत चित्त से "ॐ नमः शिवाय" 📿 या #महामृत्युंजय_मंत्र का जाप करता है, तो उसके भीतर का सारा भय, मृत्यु का डर , और संसार के मोह-माया के सारे बंधन धीरे-धीरे धुएं की तरह उड़ जाते हैं।
har har Mahadev🕉️

Ishika Dhaka

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Bhajan

murari kumar

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👌👌👌👌👌😘😘😘😘😘😍😍😍🥀🥀🥀🥀

Rohit2000 Rohit2000

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❤️❤️

kepsa

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⁣बंद कमरे में प्यार करेंगे || Band Kamre me pyar karege #viral

Lovekus ji

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