मूर्ख राज्य का स्वर्ण पक्षी | Golden Bird Moral Story in Hindi | Panchatantra Kahani | शिकारी राजा मूर्खता
मूर्खों का राज्य: स्वर्ण पक्षी की विचित्र कथा
एक घने जंगल से घिरे पहाड़ी राज्य हिमालयनगर में, एक विशालकाय देवदार के पेड़ पर रहता था एक सुंदर पक्षी, जिसका नाम था हेमराज। हेमराज का रंग सुनहरा चमकीला था, और उसकी आँखें मोती जैसी जगमगातीं। सबसे बड़ी बात, उसकी विष्ठा में छोटे-छोटे सोने के कण झिलमिलाते थे। हेमराज को यह रहस्य अच्छी तरह पता था, इसलिए वह सावधानी से ऊँचे पेड़ पर रहता और केवल जरूरत पड़ने पर ही नीचे उतरता। जंगल के जानवर इसकी पूजा करते थे, लेकिन हेमराज कभी घमंड नहीं करता था। वह सोचता, "यह प्रकृति का वरदान है, इसे बर्बाद न होने दूँ।
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एक धूप भरी सुबह, जंगल के रास्ते से गुजर रहा था एक गरीब शिकारी, नाम था गोकुल। गोकुल का जीवन कठिन था - न घर, न धन, बस एक पुराना धनुष-बाण। वह जंगली खरगोशों का शिकार करता और गाँव में बेचकर गुजारा चलाता। आज उसे कोई शिकार न मिला था, और पेट भूखा ही था। तभी, ऊपर पेड़ से हेमराज ने गलती से विष्ठा कर दी, जो सीधे गोकुल के सामने गिरी। चमकते सोने के कण देखकर गोकुल की आँखें फटी की फटी रह गईं। "अरे वाह! यह क्या चमत्कार है? यह तो सोना है!" वह चिल्लाया।
हेमराज ने सोचा कि शिकारी को कुछ पता न चलेगा और वह आगे निकल जाएगा। लेकिन गोकुल मूर्ख न था, लोभी था। उसने तुरंत अपने जाल फैलाए, बाण चलाकर हेमराज को पकड़ लिया। पक्षी छटपटाता रहा, लेकिन गोकुल ने उसे बाँध लिया। "अब तू मेरा खजाना है! रोज सोना देगा, तो मैं राजा बन जाऊँगा!" गोकुल ने हँसते हुए कहा। हेमराज उदास हो गया, लेकिन चुप रहा। गोकुल उसे उठाकर अपने झोपड़े ले आया और एक सुनहरे पिंजरे में बंद कर दिया।
पहली रात गोकुल ने सोने के कण इकट्ठे किए, लेकिन दूसरे दिन उसे डर लगने लगा। "अगर किसी ने देख लिया तो? कोई चोर आ गया तो? या गाँव वाले राजा को बता देंगे। राजा तो मुझे चोर समझकर सजा दे देगा!" गोकुल की नींद उड़ी रही। सुबह होते ही वह घबराया हुआ राजमहल की ओर चल पड़ा। दरबार में पहुँचकर उसने सिर झुकाया और कहा, "महाराज, मैंने एक चमत्कारी पक्षी पकड़ा है। इसकी विष्ठा सोने की होती है! कृपया इसे रख लीजिए, मैं गरीब हूँ।
राजा विक्रमादित्य, जो न्यायप्रिय थे, आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने हेमराज को देखा - पक्षी शांत बैठा था। राजा ने तुरंत आदेश दिया, "इसे राजमहल के सर्वोत्तम पिंजरे में रखो। सावधानी से पहरा दो। हर रोज इसकी देखभाल होगी।" गोकुल खुश होकर लौट गया, लेकिन राजा के मंत्री चंद्रसेन ने कान में फुसफुसाया, "महाराज, यह शिकारी की मूर्खतापूर्ण कल्पना है। कौन सा पक्षी सोना उगलता है? विश्वास किया तो दरबार का मजाक बनेगा। इसे छोड़ दीजिए, वरना लोग कहेंगे राजा भ्रम में हैं।
राजा पहले तो हिचकिचाए। उन्होंने हेमराज से पूछा, "क्या सचमुच तेरी यह शक्ति है?" हेमराज चुप रहा। मंत्री ने फिर कहा, "देखिए महाराज, यह तो साधारण कौवा जैसा लगता है। शिकारी ने धोखा दिया है।" आखिरकार राजा ने मान लिया। "ठीक है, इसे जंगल में छोड़ दो।" हेमराज को महल के द्वार पर ले जाकर छोड़ दिया गया। पक्षी उड़ा नहीं तुरंत, बल्कि द्वार पर ही बैठ गया। सबके सामने उसने स्वर्ण-कण वाली विष्ठा कर दी, जो जमीन पर चमकने लगी।
दरबार के लोग दौड़े, सोना इकट्ठा करने लगे। हेमराज ने ऊँची आवाज में कहा:
पहले मैं मूर्ख हेमराज, जिसने शिकारी के आगे सोना गिराया।
फिर गोकुल लोभी मूर्ख, जो व्यर्थ राजा को ले आया।
तिसरे राजा और मंत्री, जो चमत्कार को नकार बैठे।
यह राज्य मूर्खों का मंडल है, सबने बुद्धि खो दी आज!
सुनकर राजा शर्मिंदा हुए। उन्होंने गोकुल को बुलाया, इनाम दिया। लेकिन हेमराज उड़ गया जंगल की ओर। राज्य में यह कथा प्रसिद्ध हो गई।
नैतिक शिक्षा: लोभ और जल्दबाजी आँखें बंद कर देती हैं। कभी-कभी सच्चाई सामने होती है, लेकिन मूर्खता उसे नकार देती है। सच्ची बुद्धि संदेह से ऊपर उठती है।