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11 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣Shekhchilli Sasural Mein Kahani | शेखचिल्ली की ससुराल वाली मजेदार कहानी | Funny Hasy Kahani

Shekhchilli sasural mein kahani एक बेहद मजेदार और हँसी से भरपूर कहानी है जिसमें शेखचिल्ली पहली बार अपनी ससुराल जाते हैं और वहाँ उनकी अनोखी हरकतें सबको हैरान भी करती हैं और खूब हँसाती भी हैं। इस कहानी में मजाक, तुनक-मिजाजी और भोलेपन का ऐसा अनोखा मिश्रण है जिसे हर उम्र का दर्शक पसंद करेगा।

यह वीडियो बच्चों के लिए भी सुरक्षित है और बड़े भी इसे हँस-हँसकर बार-बार देखेंगे।
अगर आपको Shekhchilli की funny stories, hasya kahaniyan, लग्न-ससुराल की कॉमेडी पसंद है तो यह कहानी आपके लिए ही है।

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6 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣Shekhchilli Ki Kahani – बेगम के पैर वाली फनी स्टोरी

बेगम के पैर शेखचिल्ली की उन मजेदार कहानियों में से है, जिसमें उनकी भोली बुद्धि और हाजिरजवाबी लोगों को खूब हँसाती है। यह कहानी बच्चों और बड़ों दोनों के लिए मनोरंजक है।


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📘 कहानी (Story)

एक बार शेखचिल्ली किसी नवाब के यहाँ मेहमान बनकर पहुँच गए। नवाब खुश होकर बोले—
“शेखचिल्ली, हमारी बेगम के पैर बहुत नाज़ुक हैं। कोई भी बात हो, उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए।”

शेखचिल्ली ने इसे शाब्दिक रूप से समझ लिया और अगले ही दिन बेगम को कहीं भी चलने नहीं दिया। जब बेगम उठकर रसोई की ओर जाने लगीं, तो शेखचिल्ली दौड़कर बोले—
“बेगम साहिबा! नवाब ने मना किया है कि आपके पैर परेशान नहीं होने चाहिए, इसलिए आप चलेंगी नहीं। आप बस यहीं बैठिए, बाकी सब मैं कर दूँगा!”

घर में सब हँसते-हँसते लोट-पोट हो गए। नवाब को जब पता चला तो उन्होंने हँसते हुए कहा—
“अरे शेखचिल्ली! मेरा मतलब था कि बेगम को तकलीफ़ न हो, न कि आप उन्हें चलने न दें!”

शेखचिल्ली बोले—
“तो नवाब साहब, अगली बार साफ-साफ बताइए, वरना आप भी परेशान हो जाओगे और मैं भी!”


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2 Tampilan · 1 bulan yang lalu

utgख्याली जलेबी – शेखचिल्ली की मजेदार कहानी | Shekhchilli Funny Story | Hasy Kahani 2025

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4 Tampilan · 1 bulan yang lalu

एक दिन शेखचिल्ली जंगल में लकड़ी काटने गया। रास्ते में उसे एक पुराना मिट्टी का बर्तन मिला। उसने सोचा—“क्यों ना आज इसमें खिचड़ी बनाई जाए!” लकड़ी जलाकर उसने बर्तन चढ़ा दिया। खिचड़ी पकने लगी और शेखचिल्ली अपने सपनों में खो गया।

वह सोचने लगा—“जब खिचड़ी बनेगी, मैं इसे शहर में बेचूँगा। खूब पैसे कमाऊँगा। फिर मैं एक बकरी खरीदूँगा। बकरी बच्चे देगी। मैं ढेर सारे जानवरों का मालिक बन जाऊँगा। हर कोई मुझे शेखचिल्ली मालिक कहेगा।”

सपने में वह इतना खुश हुआ कि पैर पटककर बोला—“हाँ! मैं मालिक बनूँगा!”

पर जैसे ही उसने पैर पटका, बर्तन उलट गया… सारी खिचड़ी ज़मीन पर फैल गई। उसके सारे सपने भी उसी के साथ बिखर गए।

कहानी की सीख:
मेहनत किए बिना सिर्फ सपने देखने से कुछ नहीं मिलता।

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8 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣Shekhchilli अपनी अजब-गजब हरकतों के लिए पूरे गाँव में मशहूर थे। उनकी मासूमियत और नादानी लोगों को हंसाने का काम करती थी। एक दिन की बात है, गाँव के एक बुजुर्ग ने शेखचिल्ली से कहा,
“शेखचिल्ली, खेत में थोड़ी घास उखाड़ दो।”
और उन्हें एक खुरपा थमा दिया।


शेखचिल्ली ने खुरपा लेकर काम तो शुरू कर दिया, लेकिन थोड़ी देर बाद उनके मन में सवाल आया—
“जब यह खुरपा ही घास उखाड़ रहा है, तो मुझे क्यों मेहनत करनी चाहिए?”


उनके दिमाग में एक अजीब-सी तरकीब आई। उन्होंने खुरपे को जमीन में खड़ा किया और खुद पेड़ के नीचे जाकर लेट गए। सोचा—
“अब खुरपा खुद ही काम करेगा, मैं आराम करूँगा।”


थोड़ी देर बाद किसान आया और देखा कि शेखचिल्ली सो रहे हैं और खुरपा वहीं रखा है। किसान ने गुस्से में पूछा—
“अरे भाई, काम क्यों नहीं कर रहे?”


शेखचिल्ली बोले—
“मैं तो काम कर रहा हूँ! खुरपा घास उखाड़ने का काम करता है। मैं इसकी देखरेख कर रहा हूँ।”


किसान हड़बड़ा गया और बोला—
“अरे बुद्धू! खुरपा तभी काम करेगा जब तुम करोगे।”


शेखचिल्ली ने जवाब दिया—
“तो फिर इसे दिया ही क्यों? अगर मुझे ही सब करना है तो मैं अपने हाथ से ही उखाड़ लेता!”


किसान हँसते-हँसते लोटपोट हो गया। शेखचिल्ली की मासूम पर तर्कपूर्ण बात ने सबका दिन बना दिया।

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6 Tampilan · 1 bulan yang lalu



⭐ Shekhchilli Ki Chal Gayi – पूरी कहानी (SEO Friendly)


शेखचिल्ली अपनी मासूम हरकतों और अजीब-गरीब सोच के लिए मशहूर था। एक दिन उसने तय किया कि वह गाँव वालों के सामने अपनी “चालाकी” दिखाएगा। उसने सोचा–
“आज ऐसी ट्रिक चलाऊँगा कि सब दंग रह जाएँगे!”


वह बाजार गया और एक रस्सी लेकर पेड़ पर चढ़ गया। नीचे से लोग चिल्लाए—
“शेखचिल्ली! क्या कर रहे हो?”
शेखचिल्ली बोला—
“मैं बादलों को बाँधकर बारिश रोकने जा रहा हूँ!”


सब हँसने लगे लेकिन शेखचिल्ली को लगा कि उसकी ‘चाल’ सही चल रही है। उसने रस्सी को हवा में फेंका और जोर-जोर से खींचने लगा, जैसे बादलों को पकड़ लिया हो।


कुछ देर बाद हवा चली और रस्सी उसके हाथ से छूटकर नीचे गिर गई। शेखचिल्ली बोला—
“देखा! बादल मेरी पकड़ से डरकर भाग गए!”


गाँव वाले पेट पकड़-पकड़कर हँसने लगे। सभी ने कहा—
“शेखचिल्ली की चाल वाकई चल गई… वो भी उलटी!”


यह सुनकर शेखचिल्ली गर्व से हँसते हुए बोला—
“मैं हूँ ही इतना चालाक!”


और इसी तरह शेखचिल्ली की यह ‘चाल गई’ कहानी गाँव में मशहूर हो गई।

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7 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣⭐ रेलवे इंटरव्यू कहानी


रामू नाम का एक लड़का रेलवे में नौकरी पाने का सपना देखता था।
कई महीनों की तैयारी के बाद आखिर वह दिन आया जब उसका Railway Interview था।


रामू थोड़ा-सा घबराया हुआ था, पर आत्मविश्वास भी था।


इंटरव्यू रूम में तीन अधिकारी बैठे थे।
पहला सवाल आया—


अधिकारी: “अगर ट्रेन पटरी से उतर जाए तो आप सबसे पहले क्या करेंगे?”
रामू (घबराहट में): “सर… मैं फोटो खींचूंगा!”


अधिकारी चौंक गए—
“फोटो? क्यों?”


रामू बोला—
“सर, क्योंकि मेरे गाँव में लोग तभी मानेंगे कि मैं रेलवे में नौकरी करता हूँ!”


कमरा ठहाकों से गूंज गया।
हँसी के बाद अधिकारी बोले—
“ठीक है, अब गंभीर होकर जवाब दो।”


रामू ने कहा:
“पहले सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करूँगा, घायलों की मदद करूँगा, फिर कंट्रोल रूम को तुरंत सूचना दूँगा।”


अधिकारियों को उसका ईमानदार जवाब पसंद आया।




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🚉 इंटरव्यू का सबसे मजेदार पल


एक अधिकारी ने पूछा—
“अगर ट्रेन लेट हो जाए तो तुम क्या करोगे?”


रामू बोला—
“सर, ट्रेन लेट हो जाए तो मैं भी टाइम से घर नहीं जाऊँगा।
ट्रेन की गलती मैं कैसे निकाल सकता हूँ?”


फिर सभी हँस पड़े।
इंटरव्यू माहौल हल्का हो गया और अधिकारी उसकी समझदारी व ह्यूमर से प्रभावित हुए।


कुछ दिनों बाद रामू को कॉल आया—


“बधाई हो! आप रेलवे में चयनित हो गए हैं।”


रामू खुशी से झूम उठा।




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🎯 कहानी की सीख (Moral of the Story)


इंटरव्यू में घबराएँ नहीं, ईमानदार रहें।


हल्की-फुल्की हँसी भी माहौल को सकारात्मक बना देती है।


ज्ञान और विनम्रता कभी बेकार नहीं जाते।


खुद पर भरोसा रखें, सफलता जरूर मिलती है।

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3 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣⭐ शनि की महादशा – प्रेरक और सीख देने वाली कहानी


एक गाँव में विनय नाम का लड़का रहता था। विनय मेहनती था, पर अचानक उसके जीवन में परेशानियाँ बढ़ने लगीं।
कभी नौकरी चली जाती, कभी व्यापार में घाटा हो जाता, और लोग कहने लगे—


“अरे, इसकी शनि की महादशा चल रही है!”


विनय डर गया, सोचने लगा कि शायद उसकी किस्मत खराब हो चुकी है।
एक दिन वह पास के मंदिर गया और वहाँ एक वृद्ध संत मिले।
विनय ने अपनी सारी परेशानी बता दी।


संत मुस्कुराए और बोले—


“बेटा, शनि की महादशा बुरा समय नहीं, सीख का समय होता है। शनि मारते नहीं, सुधारते हैं।”


विनय ने पूछा—
“लेकिन मेरे साथ ही इतने संकट क्यों?”


संत ने एक दीपक दिखाते हुए कहा—


“देखो, यह दीपक तभी तेज जलता है जब उसका तेल कम होने लगे।
इसी तरह, मनुष्य भी कठिन समय में ज्यादा चमकता है।”




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🌒 विनय का जीवन कैसे बदला?


संत की बात ने विनय की सोच बदल दी।
उसने मेहनत जारी रखी, गुस्सा और चिंता छोड़ दी, और धीरे-धीरे उसका काम चलने लगा।
लोग फिर कहने लगे—


“वाह! इसकी शनि की महादशा ने इसे ऊँचा उठा दिया।”


विनय समझ चुका था—
कठिन समय हमें तोड़ने नहीं, बल्कि मजबूत करने आता है।




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🎯 कहानी की सीख (Moral of the Story)


शनि की महादशा हमेशा बुरा समय नहीं होती।


चुनौतियाँ हमें सफलता के लिए तैयार करती हैं।


धैर्य, मेहनत और सही सोच से हर मुश्किल आसान दिखने लगती है।


समय चाहे जैसा भी हो, विश्वास कभी नहीं छोड़ना चाहिए।

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3 Tampilan · 1 bulan yang lalu



⭐ कम बंद पड़े तो वो दिखाई दे – हास्य कहानी


एक गाँव में मन्नू काका नाम के आदमी रहते थे। काका की एक आदत बड़ी अजीब थी—
जब भी घर के लोग कुछ उनसे छुपाते, काका कहते:


“अरे बेटा! कमरे की बत्ती बंद करो, कम बंद पड़े तो वो दिखाई दे!”


सब लोग हँसते थे, पर काका को पूरा यकीन था कि अंधेरे में आँखें ज्यादा काम करती हैं।




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🔦 मजेदार घटना


एक दिन काका के पोते ने एक टॉफी चुरा ली और तकिये के नीचे छिपा दी।
काका को शक हुआ।
उन्होंने बोला:


“बत्ती बंद करो! अभी पता चलता है टॉफी कहाँ है!”


सबने कमरे की लाइट बंद कर दी।
काका हाथ आगे बढ़ाते हुए बोले—
“अंधेरा है, इसलिए अब साफ दिखेगा!”


पर अंधेरे में देखते-देखते काका खुद ही खाट से टकरा गए।


धड़ाम!


घर वाले बोले—
“काका! कुछ दिखा?”


काका हँसते हुए बोले—
“हाँ… खाट जरूर दिखाई दी, क्योंकि उसी से टकराया हूँ!”


तभी पोता डर गया और बोला—
“काका! टॉफी मैंने चुराई थी… ये रही!”


काका मुस्कुराकर बोले—
“देखा! मैंने कहा था न, कम बंद पड़े तो वो दिखाई दे!”


सब जोर-जोर से हँसने लगे।




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🎯 कहानी की सीख (Moral of the Story)


सच ज्यादा देर छिप नहीं सकता।


हर बात पर शक नहीं करना चाहिए।


हँसी-मजाक से घर में खुशियाँ ही फैलती हैं।

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5 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣⭐ Duniya Gol Hai – हास्य कहानी


एक बार की बात है, एक गाँव में गट्टू नाम का मजेदार और थोड़ा-सा घमंडी आदमी रहता था।
गट्टू को हमेशा लगता था कि वह दुनिया का सबसे होशियार इंसान है। चाहे कोई बात हो, वह कह देता—
“अरे यह तो मेरे लिए चुटकी बजाने जैसा आसान है!”


एक दिन गाँव के चौपाल में बातचीत चल रही थी कि दुनिया गोल है।
गट्टू ने पूरा यकीन से कहा:


“जिसने भी ये कहा है, गलती कहा है! मैं अपनी आँखों से देखूँगा कि दुनिया गोल है या चौकोर!”


लोग हँसने लगे, पर गट्टू ने ठान लिया कि वह इस बात की सच्चाई जानकर ही लौटेगा।
वह एक पोटली उठाकर निकल पड़ा—“दुनिया का कोना ढूंढने!”




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🌍 गट्टू का मजेदार सफर


चलते-चलते गट्टू थक गया। वह जहाँ भी पहुँचता, वही चीज़ें दोबारा दिखने लगतीं—
वही पेड़-वही मोड़, वही नहर, वही नीम का पेड़।


उसने सोचा—
“अरे! लगता है ये पेड़ भी मेरे साथ घूम रहा है!”


उधर गाँव वाले पहले ही समझ गए थे कि गट्टू गोल-गोल घूम रहा है।
गट्टू को तो लगा कि दुनिया उसके पीछे घूम रही है!


तीसरे दिन वह उसी चौपाल पर वापस आ गिरा।
सब बोले—
“कहो गट्टू भाई, दुनिया मिली?”


गट्टू बोला हाँफते-हाँफते—
“मिली क्यों नहीं? दुनिया गोल है… तभी तो मैं घूम-फिर कर यहीं आ गया!”


सब हँसते-हँसते लोटपोट हो गए।




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🎯 कहानी की सीख (Moral of the Story)


दुनिया गोल है, लेकिन कभी-कभी आदमी की अकड़ उससे भी ज़्यादा गोल हो जाती है।


घमंड हमेशा इंसान को वहीं वापस ले आता है जहाँ से वह शुरू हुआ था।


सीखने में कोई शर्म नहीं, हँसी में भी ज्ञान छिपा होता है।

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8 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣मौत के छाँव – पूरी कहानी (SEO Friendly)


एक घने जंगल के बीच बसा एक छोटा सा गांव था—धनपुर। यह गांव अपनी शांत प्रकृति के लिए मशहूर था, लेकिन सूरज ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलना बंद कर देते थे। इसका कारण था—“मौत की छाँव”।


कहते थे कि रात के समय एक काली परछाईं गांव की गलियों में घूमती है। जो भी उसके सामने आता, वह सुबह तक ज़िंदा नहीं बचता। किसी ने उसे करीब से कभी नहीं देखा, सिर्फ तेज़ ठंडी हवा, पैरों की आहट और किसी अनजान की परछाईं... इतना काफी था लोगों को डराने के लिए।


एक दिन गांव में रवि नाम का बहादुर युवक आया। उसे इन अफवाहों पर विश्वास नहीं था। उसने फैसला किया कि वो इस रहस्य को सुलझाएगा।
रात गहराई, चाँद बादलों के पीछे छिप गया और सन्नाटा फैल गया। रवि एक लालटेन लेकर बाहर निकला। हवा अचानक ठंडी होने लगी—जिसे गांव वाले "मौत के आने की निशानी" कहते थे।


अचानक उसे लगा कोई उसके पीछे खड़ा है। उसने पलटकर देखा—एक ऊँची काली परछाईं, बिना चेहरा, बिना आवाज़… सिर्फ एक डरावनी ठंडक।
रवि ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी लालटेन ऊंची उठाई और तेज़ आवाज़ में कहा—


“तुम कौन हो? क्यों डराते हो गांव वालों को?”


कुछ पल शांत रहा, फिर वह परछाईं धीरे-धीरे एक बूढ़े आदमी का रूप लेने लगी। वह बोला—


“मैं इस गांव का पहरेदार हूँ। सालों पहले इस गांव को एक महामारी ने घेर लिया था। मैं सबको बचाते-बचाते खुद मर गया। मेरा वादा था—जब तक गांव सुरक्षित न हो, मेरी आत्मा पहरा देती रहेगी। मैंने किसी को मारा नहीं… मौत ने खुद उन्हें लिया।”


रवि को सच्चाई पता चली। उसने गांव में एक पूजा रखवाई। गांव वालों ने पहली बार मौत की छाँव को खतरा नहीं, बल्कि रक्षक की आत्मा माना। पूजा के बाद वह परछाईं धीरे-धीरे हवा में घुल गई… और अगले दिन गांव सालों बाद पहली बार बेखौफ नींद सोया।




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⭐ कहानी की सीख (Moral of the Story)


हर डर के पीछे सच छुपा होता है।


बिना समझे किसी को दोषी नहीं मानना चाहिए।


साहस हमेशा अंधेरे पर जीतता है।

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6 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣तारे ही तारे कहानी (Tare Hi Tare Kahani)


एक शांत रात थी। आसमान बिलकुल साफ था और उसमें तारे ही तारे चमक रहे थे। गाँव का एक छोटा बच्चा अनय अपने घर की छत पर बैठकर आसमान को निहार रहा था। हर तारा उसे अलग-अलग तरह से चमकता हुआ दिख रहा था।


कुछ तारे ज्यादा चमकीले थे, कुछ कम। कुछ पास लगते थे और कुछ बहुत दूर।
अनय ने अपनी माँ से पूछा—


“माँ, ये तारे अलग-अलग क्यों चमकते हैं?”


माँ मुस्कुराई और बोली—


“बेटा, हर तारे की अपनी रोशनी होती है। जैसे-जैसे वो मेहनत करता है, उतनी ही ज्यादा चमक पैदा करता है। कोई भी तारा बिना कोशिश के चमकदार नहीं बनता।”


अनय ने उत्सुकता से फिर पूछा—
“क्या मैं भी किसी तारे की तरह चमक सकता हूँ?”


माँ ने उसके सिर पर हाथ फेरा और कहा—
“हाँ बेटा, अगर तुम अपने काम, पढ़ाई और सपनों के लिए लगातार मेहनत करोगे, तो तुम भी आकाश के सबसे चमकीले तारे की तरह चमकोगे।”


उस रात अनय ने तारों को एक-एक करके देखना शुरू किया। उसे ऐसा लगा जैसे हर तारा उसे अपनी कहानी सुना रहा हो—
“हार मत मानो… आगे बढ़ते रहो… एक दिन चमक तुम्हारे हिस्से भी आएगी।”


धीरे-धीरे अनय की आँखें बंद होने लगीं।
तारों की चमक जैसे उसे एक मीठे सपने में ले जा रही थी—सपना जहाँ वह अपने लक्ष्य तक पहुँच चुका था और आसमान में एक चमकीला तारा उसकी तरह जगमगा रहा था।




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⭐ कहानी की सीख (Moral of the Story)


हर इंसान की अपनी अलग चमक होती है।


मेहनत और लगन से कोई भी ऊँचाइयाँ छू सकता है।


कभी भी खुद की तुलना दूसरों से न करें।


अपने सपनों में विश्वास रखें, वे जरूर पूरे होते हैं।

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9 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣चिड़िया की ज्ञान की बातें | Inspirational Moral Story in Hindi


एक घने जंगल में एक छोटी सी चिड़िया रहती थी। वह दिखने में भले ही छोटी थी, लेकिन उसकी सोच बहुत बड़ी और समझदारी से भरी थी।
जंगल के कई जानवर उसकी बातें सुनते और उससे सीख लेते थे।


एक दिन जंगल में भयानक आग लग गई। सभी जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर दौड़ने लगे। बड़े-बड़े जानवर जैसे हाथी, शेर और भालू भी डर गए थे।


लेकिन उसी समय देखो, वही छोटी चिड़िया अपनी चोंच में कुछ बूंद पानी लेकर आग पर डाल रही थी।
सभी जानवर हँसने लगे—


“अरे चिड़िया! तेरी चोंच की बूंदों से आग क्या बुझ जाएगी?”


चिड़िया ने शांत होकर कहा:


“शायद नहीं… लेकिन मैं अपनी तरफ से प्रयास ज़रूर कर रही हूँ।
अगर हम सब मिलकर कोशिश करें, तो बड़ी से बड़ी समस्या भी हल हो सकती है।”


उसकी ये बात जंगल के सभी जानवरों के दिल को छू गई।
धीरे-धीरे सब जानवर पानी लाने लगे। मिलकर मेहनत की, और आख़िरकार आग बुझ गई।


जंगल के सभी जानवरों ने मान लिया कि—


“छोटी सी कोशिश भी बड़े बदलाव ला सकती है।”




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⭐ कहानी का नैतिक (Moral of the Story)


छोटी से छोटी कोशिश भी मायने रखती है।


बड़े काम मिलकर करने से ही संभव होते हैं।


हिम्मत और सकारात्मक सोच हमेशा जीत दिलाती है।

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4 Tampilan · 1 bulan yang lalu

🦁 शेर और चूहे की कहानी | Panchtantra Moral Story

बहुत समय पहले जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था। एक दिन वह गहरी नींद में था। तभी एक छोटा सा चूहा खेलते-खेलते उसकी पीठ पर चढ़ गया।
शेर की नींद खुली, और उसने चूहे को अपने बड़े पंजों में दबोच लिया।

चूहा डरते-डरते बोला:
“महाराज! मुझे माफ कर दीजिए। शायद मैं भी कभी आपकी मदद कर सकूँ।”

शेर यह सुनकर ज़ोर से हँसा। उसे लगा कि इतना छोटा सा चूहा भला उसकी क्या मदद करेगा?
लेकिन फिर भी उसने दयालुता दिखाते हुए चूहे को छोड़ दिया।

कुछ दिनों बाद वही शेर शिकारी के जाल में फँस गया। वह ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ने लगा।
आवाज़ सुनकर चूहा तुरंत वहाँ आया। उसने अपने तेज दाँतों से जाल को काटना शुरू किया।

थोड़ी ही देर में शेर आज़ाद हो गया। उसने चूहे का धन्यवाद किया और समझ गया कि —
कभी भी किसी को छोटा या कमजोर नहीं समझना चाहिए।


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⭐ कहानी का नैतिक (Moral of the Story)

किसी को भी कमज़ोर मत समझो।

हर जीव का अपना महत्व होता है।

नेकी का फल सदैव अच्छा होता है।

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9 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣एक समय की बात है, एक राज्य में एक न्यायी और दयालु राजा रहता था। वह अक्सर भेष बदलकर अपने राज्य का हाल देखने जाता था ताकि उसे लोगों की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।


एक दिन राजा ने साधारण किसान के कपड़े पहनकर गांव की ओर चलना तय किया। रास्ते में उसे एक किसान खेत में कड़ी मेहनत करते हुए दिखाई दिया। किसान धूप में पसीने से तरबतर होकर खेती कर रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर थकान के बजाय संतोष दिख रहा था।


राजा ने उससे पूछा—
“भाई, इतनी मेहनत क्यों करते हो? क्या तुम्हें कभी थकान नहीं होती?”


किसान मुस्कुराकर बोला—
“मैं मेहनत इसलिए करता हूँ कि मेरे परिवार को दो वक्त की रोटी मिल सके। मेहनत करने से संतोष मिलता है और भगवान ने मेहनत का फल कभी व्यर्थ नहीं जाने दिया।”


राजा उसकी ईमानदारी और मेहनत से बहुत प्रभावित हुआ। उसने फिर पूछा—
“तुम्हारे खेत में पानी की कमी तो नहीं होती?”


किसान बोला—
“कभी-कभी होती है, लेकिन मैं शिकायत नहीं करता। राजा हमारा है, वह जरूर किसी दिन इसका समाधान करेगा।”


किसान की यह बात सुनकर राजा का हृदय पिघल गया। राजा ने सोचा—
“यह आदमी कठिनाइयों के बावजूद मेरा इतना विश्वास करता है। मुझे इसके लिए कुछ करना चाहिए।”


अगले ही दिन राजा ने अपने दरबार में आदेश दिया कि उस गांव में एक नई नहर बनाई जाए, ताकि किसानों को सालभर पानी मिल सके। साथ ही, उसने किसान को उसके परिश्रम के लिए सम्मान और उपहार भी दिया।


जब किसान को पता चला कि वही साधारण आदमी वास्तव में राजा था, तो वह भावुक हो गया और बोला—
“महाराज, आपने मेरे गांव की तकदीर बदल दी। इसी विश्वास ने मुझे हमेशा ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा दी।”


राजा मुस्कुराया—
“मेहनत और विश्वास रखने वाले लोग ही राज्य की असली ताकत होते हैं।”⁣🌟 कहानी की सीख (Moral of the Story)


मेहनत और ईमानदारी का फल हमेशा मिलता है।


सच्चा नेता वही होता है जो अपनी प्रजा का हाल समझे।


कर्तव्य और विश्वास जीवन को मजबूत बनाते हैं।


बुरे हालात में भी सकारात्मक सोच बहुत काम आती है।

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3 Tampilan · 1 bulan yang lalu

⁣एक घने जंगल में एक भेड़िया रहता था। एक दिन वह बहुत जल्दी-जल्दी खा रहा था, तभी उसकी हड्डी गले में फंस गई। दर्द और घुटन से परेशान होकर वह इधर-उधर भागने लगा।


जंगल के किनारे उसे एक लंबी गर्दन वाला सारस दिखाई दिया। भेड़िया सारस से बोला,
“कृपया मेरी मदद करो। मेरी गर्दन में हड्डी फंस गई है। अपनी लंबी चोंच से इसे निकाल दो। मैं तुम्हें अच्छा इनाम दूंगा।”


सारस को उस पर दया आ गई। उसने अपने चोंच को भेड़िये के बड़े मुँह में डालकर सावधानी से हड्डी बाहर निकाल दी। भेड़िया तुरंत दर्द से राहत महसूस करने लगा।


सारस ने कहा,
“अब मुझे मेरा इनाम दो।”


भेड़िया हँसते हुए बोला,
“क्या इतना बड़ा भेड़िया भी तुम्हारा सिर अपने मुँह से सुरक्षित वापस निकालने का इनाम नहीं है? चलो भागो यहाँ से!”


सारस समझ गया कि उसने एक स्वार्थी प्राणी पर भरोसा किया था। निराश होकर वह उड़ गया।




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📚 कहानी की सीख (Moral of the Story)


स्वार्थी लोगों से किसी इनाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।


नेकी करो और आगे बढ़ जाओ।


समझदारी से मदद करो, लेकिन इनाम की लालच मत रखो।

⁣भेड़िया और सारस की कहानी


Bhediya aur Saras ki Kahani


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Panchatantra stories in Hindi


बच्चों के लिए नैतिक कहानी

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8 Tampilan · 2 bulan yang lalu

⁣राक्षस और राजकुमार – पूरी कहानी (Full Story)


बहुत समय पहले अवंतिका राज्य में एक बहादुर राजकुमार आरव रहता था। राज्य में सब कुछ शांत था, लेकिन एक समस्या थी—
पास के जंगल में एक भयानक राक्षस रहता था, जो रात होते ही लोगों को डराता और उनकी चीज़ें लूट लेता।


एक दिन राजकुमार ने निर्णय लिया—
“अब बहुत हुआ, मैं इस राक्षस से खुद बात करूँगा।”


राजा ने मना किया, पर राजकुमार अडिग था।
वह घोड़े पर सवार होकर जंगल पहुँचा।


जैसे ही वह गुफा के पास पहुँचा, राक्षस गरजा,
“कौन है जो मेरी नींद खराब करने आया है?”


राजकुमार साहस से बोला,
“मैं आरव हूँ। अगर तुम लोगों को परेशान करना बंद कर दो, तो मैं तुम्हें भी सम्मान से जीने दूँगा।”


राक्षस चौंका—
“कोई मुझसे बातें करने की हिम्मत नहीं करता… तुम क्यों कर रहे हो?”


राजकुमार बोला,
“क्योंकि हर बुरे के पीछे एक वजह होती है। बताओ तुम इतने गुस्से में क्यों रहते हो?”


राक्षस की आँखें भर आईं,
“मैं पहले एक इंसान था। लोगों ने मुझे धोखा दिया, इसलिए मैं जंगल में अकेला रहने लगा। गुस्सा बस आदत बन गया…”


राजकुमार मुस्कुराया,
“तो आदत बदलो। मैं तुम्हें मौका देता हूँ—राज्य की रक्षा करो, लोगों की मदद करो। तुम मेरे सैनिकों में शामिल हो सकते हो।”


राक्षस ने पहली बार दहाड़ नहीं लगाई—बल्कि सिर झुका दिया।
“अगर तुम मुझ पर भरोसा करते हो, मैं बदलने को तैयार हूँ।”


राजकुमार उसे महल ले गया।
धीरे-धीरे लोग राक्षस को डरने की बजाय सम्मान देने लगे।
अब वही राक्षस, जो कभी खतरा था, राज्य का सबसे भरोसेमंद रक्षक बन गया।


राजा ने घोषणा की—
“सच्चा योद्धा वही है जो तलवार से नहीं, दिल से जीतता है।”




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सीख (Moral of the Story)


हर बुराई के पीछे कोई छिपी कहानी होती है।


दया और समझदारी से बड़ा कोई हथियार नहीं।


इंसान बदल सकता है, अगर उसे मौका दिया जाए।

rupeshkum
7 Tampilan · 2 bulan yang lalu

⁣बिल भिजवा देता है – मजेदार हास्य कहानी


शहर में गोपाल नाम का आदमी था, जो हर जगह जाता था लेकिन कभी खुद पैसे नहीं देता था।
उसकी एक ही ट्रिक—
“मैं तो बाद में बिल भिजवा देता हूँ!”


एक दिन वह अपने दोस्त राकेश के साथ होटल गया।
गोलगप्पे, चाट, दो प्लेट छोले-भटूरे… सब खत्म होने के बाद वेटर आया।


राकेश बोला,
“गोपाला, आज तू पैसे देगा!”


गोपाला हँसकर बोला,
“अरे पैसे क्यों दूँ? मैं बिल भिजवा देता हूँ।”


राकेश ने माथा पकड़ लिया,
“किसको भिजवाएगा? घरवालों को?”


गोपाला बोला,
“नहीं रे… खाने की दुकान वाले को!”


वेटर हैरान,
“बाबूजी, हम ही तो होटल वाले हैं! बिल हमें ही देना है!”


गोपाला अकड़कर बोला,
“तो भिजवा दूँगा ना! तुम एक बार बिल भेजकर देखो… मैं भी भेज दूँगा वापस!”


वेटर गुस्से में बोला,
“क्या मतलब?”


गोपाला बोला,
“सीधी बात है—तुम बिल भेजोगे, मैं व्हाट्सऐप पर ‘Seen’ करके छोड़ दूँगा!”


यह सुनते ही पूरा होटल हँसी से गूंज उठा।
वेटर ने कहा,
“बाबूजी, ये होटल है, व्हाट्सऐप ग्रुप नहीं!”


आखिर में राकेश ने मजबूरी में पैसे दिए और जाते-जाते कहा—
“गोपाला, तू बहुत बड़ा कलाकार है।”


गोपाल मुस्कुराया—
“कलाकार नहीं भाई… बिल-कारक हूँ! जो भी बिल आता है, वापस भिजवा देता हूँ!”

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