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Gulam sarwar
11 vistas · 17 horas hace

26 नवंबर 2008 की रात, मुंबई की सड़कों पर गोलियों की आवाज़ गूँजी…
दुनिया ने इसे सिर्फ एक आतंकी हमला समझा,
लेकिन असल में यह भारत की खुफिया व्यवस्था के लिए एक चेतावनी थी।
इस वीडियो में हम जानेंगे:
कैसे 26/11 Mumbai attacks की साजिश रची गई
Lashkar-e-Taiba और Hafiz Saeed की भूमिका
भारत की खुफिया एजेंसियों से कहाँ चूक हुई
और 26/11 के बाद सुरक्षा व्यवस्था में क्या-क्या बदला
यह कहानी किसी एक सुपरस्पाई की नहीं,
बल्कि उन हजारों गुमनाम लोगों की है
जो हर दिन खामोशी से देश की रक्षा करते हैं।
“ये हमला रोका जा सकता था?”
“26/11: इंटेलिजेंस की सबसे बड़ी चूक”
“खामोश जंग जो हमें दिखती नहीं”
“जब दुश्मन बॉर्डर पार नहीं, अंदर घुस आया”