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प्राचीन भारत के महान आचार्य चाणक्य की यह कहानी हमें सिखाती है कि अपमान को ताकत बनाकर कैसे सफलता हासिल की जाती है। धैर्य, रणनीति और आत्मविश्वास से असंभव भी संभव हो सकता है।