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“गरीब, सेवक हो कर उतरे, इस पृथ्वी के माहि।
जीव उधारन जगतगुरु, बार-बार बलि जांही।।
“गरीब, सेवक हो कर उतरे, इस पृथ्वी के माहि।
जीव उधारन जगतगुरु, बार-बार बलि जांही।।
शास्त्रानुकूल भक्ति देते है संत रामपाल जी महाराज स्वयं कबीर साहेब जी आए हुए है
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