JavedKureshi
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एक छोटे से गाँव में दादी और उनका प्यारा सा मुर्गा रेलवे पटरी के पास एक सूरजमुखी का बीज लगाते हैं। प्यार और मेहनत से वह बीज एक विशाल, सुनहरे फूलों वाले पेड़ में बदल जाता है। लेकिन अचानक आती तेज़ रफ्तार ट्रेन उनकी खुशियों को तोड़ देती है।
क्या मेहनत और उम्मीद फिर से खिल सकती है?
यह कहानी हमें सिखाती है कि हार के बाद भी उम्मीद का बीज फिर बोया जा सकता है। 🌻
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