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अकबर और बीरबल कि कहानी
अकबर और बीरबल कि कहानी #longvideo #apnatube
इस वीडियो में अकबर और बीरबल की एक रोचक, हास्यपूर्ण और गहन संदेश देने वाली कथा प्रस्तुत है। कहानी में तुलसी माता, बिच्छुपत्ती, गौ माता और गंगा मैया के माध्यम से भारतीय संस्कृति में “माता” के महत्व को सरल उदाहरणों से समझाया गया है। बीरबल की बुद्धिमत्ता से अकबर को यह बोध होता है कि प्रकृति और जीवनदायिनी शक्तियाँ बिना भेदभाव सबका कल्याण करती हैं। यह कथा मनोरंजन के साथ-साथ श्रद्धा, सहनशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देती है। वीडियो अंत तक देखें और सीखें एक सुंदर जीवन दर्शन। जय जगन्नाथ।
यह कहानी महाभारत के उन रहस्यों को उजागर करती है, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। सभी मानते हैं कि शकुनि कौरवों का हितैषी था, लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग था। गांधारी के बकरे से हुए प्रतीकात्मक विवाह और उसके छिपाए जाने पर धृतराष्ट्र ने गांधार नरेश सुबाला व उनके पुत्रों को कारागार में डाल दिया। प्रताड़ना के बीच सुबाला ने शकुनि को प्रतिशोध के लिए तैयार किया। अपनी रीढ़ की हड्डी से बने पासे देकर उसने कौरव वंश के अंत की नींव रखी। हस्तिनापुर में विश्वास जीतकर शकुनि ने दुर्योधन को भड़काया और महाभारत युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की।
यह कथा प्रभुदास नामक सरल भक्त की अद्भुत भक्ति और भगवान जगन्नाथ के अपार कृपा‐चमत्कार को दर्शाती है। प्रभुदास रोज़ दो दिव्य युवकों को बिना दाम लिए पान खिला देते थे। जब बलराम दास ने उन्हें दाम माँगने को कहा, तब उन युवकों ने अपनी चादरें बंधक रखकर पान लिया। अगले दिन मंदिर में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र की वही श्वेत चादरें गायब मिलीं। राजा प्रताप रुद्रदेव को स्वप्न में सच्चाई बताकर भगवान ने सेवकों को दंड से बचाया और पान भोग की प्रथा आरंभ हुई। अंत में प्रभुदास को साक्षात दर्शन का सौभाग्य मिला।
the story of lord Jagannath
यह रोमांच और दहशत से भरी कहानी आपको बांधे रखेगी। शीतल एक अनजान रोने की आवाज का पीछा करते हुए एक बंद पड़े फ्लैट तक पहुंचती है, जहाँ उसे एक रहस्यमयी औरत — सुमन रस्तोगी — मिलती है। काले नाइटगाउन, खुले बाल और हाथ में जलती कैंडल लिए सुमन का शांत चेहरा शीतल को और डरा देता है। शीतल कसम खाती है कि उसने किसी को रोते सुना था, जबकि सुमन और उसका पति रजत इसे उसकी गलतफहमी बताते हैं। पर बंद पड़े उस फ्लैट का सच क्या है? शीतल का डर भ्रम है या कोई छिपा हुआ रहस्य?
motivation speech of khan sir
