最新视频
जब तक भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी पर विराजमान थे,
तब तक अधर्म काँपता था और धर्म सुरक्षित रहता था।
पर जिस क्षण भगवान ने अपनी लीला समेटनी शुरू की —
पूरा संसार अशुभ संकेतों से भर उठा।
🌑 धरती बिना कारण काँपने लगी
🌬️ हवाएँ विकृत दिशा में बहने लगीं
🐄 पशु-पक्षी करुण क्रंदन करने लगे
🌕 सूर्य और चंद्रमा अपनी आभा खो बैठे
यह सब संकेत थे एक महावियोग के —
भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के।
इस दिव्य कथा में आप सुनेंगे —
✨ धर्मराज युधिष्ठिर की हृदयविदारक व्याकुलता
✨ अर्जुन का काँपता हुआ धनुष
✨ नारद मुनि का गंभीर संदेश
✨ और कलियुग के पूर्ण प्रवेश की घोषणा
📿 यह केवल एक कथा नहीं,
बल्कि यह चेतावनी है कि —
जब ईश्वर दूर होते हैं, तब संसार भीतर से टूटने लगता है।
👉 इस अध्याय से हमें यह संदेश मिलता है कि
कलियुग में केवल हरिनाम और भक्ति ही सच्चा सहारा है।
🔔 कथा सुनते समय मन शांत होगा,
हृदय भर आएगा
और आत्मा वैराग्य से भर उठेगी।
🔔 आपसे विनम्र अनुरोध
यदि यह कथा आपके हृदय को छू जाए —
तो Like, Share और Subscribe अवश्य करें,
ताकि यह दिव्य ज्ञान अधिक से अधिक भक्तों तक पहुँचे।
🙏 जय श्रीकृष्ण | जय श्रीमद्भागवत महापुराण 🙏
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था,
धर्म की विजय हो चुकी थी,
पांडवों का राज्य स्थापित था—
फिर भी… हस्तिनापुर के राजमहल में एक आत्मा तड़प रही थी।
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध, त्रयोदश अध्याय में आता है वह क्षण,
जब राजा धृतराष्ट्र—जो जीवन भर मोह, पुत्रासक्ति और सत्ता के अंधेपन में जिये—
अचानक सब कुछ त्यागकर वन की ओर चल पड़ते हैं।
यह कोई साधारण त्याग नहीं था—
यह था अपमान से जन्मा वैराग्य,
और मृत्यु से पहले आत्मा का जागरण।
इस अध्याय में— 🔸 महात्मा विदुर का ऐसा कठोर उपदेश मिलता है, जो आज भी हर मनुष्य को भीतर तक झकझोर देता है
🔸 गांधारी का मौन वैराग्य और कुंती का करुण विलाप हृदय को द्रवित कर देता है
🔸 राजा युधिष्ठिर के मन में पहली बार राजत्याग का विचार जन्म लेता है
🔸 और नारद मुनि कलियुग के उन भयानक लक्षणों को प्रकट करते हैं, जिन्हें आज हम प्रत्यक्ष देख रहे हैं
यह अध्याय सिखाता है— 👉 त्याग कमजोरी नहीं, सबसे बड़ा साहस है
👉 जो समय रहते नहीं जागता, उसे काल जबरन जगा देता है
👉 भगवान के बिना संसार केवल शून्य रह जाता है
यदि आप जीवन में कभी मोह, अपमान, असुरक्षा या भय से घिरे हों—
तो श्रीमद्भागवत 1.13 आपके लिए आत्मा की अंतिम पुकार बन सकता है।
📿 कथा सुनिए, हृदय से सुनिए—क्योंकि यह अध्याय हमें नहीं, हमारे अहंकार को छोड़ने आया है।
हरि: ॐ 🙏
भगवान श्रीकृष्ण के परमधाम गमन के बाद पृथ्वी पर छा गया सन्नाटा…
धर्म डगमगाने लगा, सत्य काँप उठा और कलियुग स्वयं मनुष्य का रूप धारण कर प्रकट हो गया।
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के द्वादश अध्याय में हम देखते हैं—
🔱 पांडवों का वैराग्य और राज्य का त्याग
👑 गर्भ में भगवान द्वारा रक्षित राजा परीक्षित का राज्याभिषेक
🐄 धर्मरूपी गाय और बैल पर कलियुग का अत्याचार
⚔️ राजा परीक्षित का धर्मयुक्त निर्णय—वध नहीं, नियंत्रण
🕉️ और कलियुग में भी मुक्ति का एकमात्र मार्ग—हरिनाम संकीर्तन
यह कथा केवल इतिहास नहीं,
यह आज के कलियुग के लिए जीवित चेतावनी और अमर आशा है।
✨ जहाँ पाप बढ़ता है,
✨ वहीं भगवान का नाम और अधिक शक्तिशाली हो जाता है।
इस दिव्य कथा को अंत तक सुनिए और समझिए—
कलियुग में भी कैसे भक्ति सबसे बड़ा कवच है।
📿 “हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे”
कुरुक्षेत्र का महासंग्राम समाप्त हो चुका है…
धर्म की विजय हो गई है…
लेकिन द्वारका अभी भी बेचैन है… क्योंकि उसका प्राण—श्रीकृष्ण—अभी लौटा नहीं है।
यह कथा है उस पल की,
जब शंखनाद गूंजता है…
आकाश पुष्पवर्षा करता है…
और द्वारका की गलियों में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का मंगल प्रवेश होता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण प्रथम स्कंध का एकादश अध्याय
हमें दिखाता है— 🔹 भक्तों की उत्कट प्रतीक्षा
🔹 द्वारका की स्त्रियों का हृदय-विदारक विरह
🔹 भगवान की एक मुस्कान से मिटता सारा दुख
🔹 और वह प्रेम, जो शब्दों से परे है
यह केवल कथा नहीं…
यह भक्ति का अनुभव है।
यह अध्याय बताता है कि भगवान जहाँ होते हैं, वहाँ जीवन उत्सव बन जाता है।
📖 इस कथा में आप जानेंगे— ✔ द्वारका के लोग श्रीकृष्ण की प्रतीक्षा कैसे करते हैं
✔ भगवान के रथ का दिव्य वर्णन
✔ भक्तों के नेत्रों से बहता प्रेम
✔ श्रीकृष्ण का लोकमंगल स्वरूप
यदि आप कृष्ण-भक्ति, भागवत कथा और आध्यात्मिक शांति की खोज में हैं,
तो यह कथा आपके हृदय को छू जाएगी।
🙏 कथा सुनिए…
🙏 अनुभव कीजिए…
🙏 और श्रीकृष्ण को अपने जीवन में प्रवेश करने दीजिए…
जय श्रीकृष्ण | जय द्वारकाधीश 🌸
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था,
धर्म की विजय हो चुकी थी…
लेकिन इसके बाद आया वह क्षण जिसने पूरे हस्तिनापुर को रुला दिया।
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध, दशम अध्याय में वर्णित यह कथा है
भगवान श्रीकृष्ण की विदाई की —
जब साक्षात नारायण पांडवों से विदा लेकर द्वारका लौटते हैं।
👉 कुंती का काँपता हृदय
👉 द्रौपदी का मौन विलाप
👉 अर्जुन की भीगी आँखें
👉 और नगर की स्त्रियों का करुण क्रंदन
यह केवल विदाई नहीं,
यह भक्ति का महासागर,
यह वियोग का अमृत,
और यह सिखाता है कि —
भगवान शरीर से दूर हो सकते हैं,
पर हृदय से कभी नहीं।
इस कथा में जानिए — 🔸 श्रीकृष्ण क्यों हस्तिनापुर छोड़ते हैं?
🔸 भगवान के जाते ही कलियुग की आहट क्यों सुनाई देती है?
🔸 वियोग-भक्ति क्या होती है?
🔸 हम आज भी श्रीकृष्ण को अपने जीवन में कैसे रख सकते हैं?
🙏 यह कथा हर उस भक्त के लिए है
जो जीवन के संघर्ष में
श्रीकृष्ण को अपना सहारा मानता है।
📿 पूरी कथा सुनिए और अनुभव कीजिए
श्रीमद्भागवत महापुराण – प्रथम स्कंध, दशम अध्याय
के उस भाव को,
जहाँ विदाई भी भक्ति बन जाती है।
✨ अगर चाहें तो मैं
इसी विषय पर थंबनेल टेक्स्ट (Bold & Viral)
Short/Reel Hook Lines
या अगले अध्याय (1.11) का टाइटल-डिस्क्रिप्शन
भी तुरंत बना दूँ।
बस बताइए 🌺
क्या मृत्यु भी मोक्ष बन सकती है?
क्या भगवान का क्रोध भी भक्त के लिए वरदान हो सकता है?
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के नवम अध्याय में हमें मिलती है
एक ऐसी दिव्य कथा—
जो जीवन, धर्म, भक्ति और मृत्यु—चारों का अंतिम सत्य प्रकट करती है।
कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद,
शरशय्या पर पड़े भीष्म पितामह,
साक्षात भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करते हैं।
वह दृश्य केवल नेत्रों का नहीं,
आत्मा का अनुभव है।
इस कथा में जानिए—
🔹 भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का रहस्य
🔹 भगवान श्रीकृष्ण का भक्त-वत्सल स्वरूप
🔹 अर्जुन के सारथी बने भगवान का वह क्रोध
🔹 राजधर्म, दानधर्म और मोक्ष का उपदेश
🔹 मृत्यु के समय भगवान का स्मरण क्यों है सबसे बड़ा साधन
यह कथा हमें सिखाती है—
👉 पूरी ज़िंदगी कैसी भी हो,
यदि अंत श्रीकृष्ण में है—तो मोक्ष निश्चित है।
📿 यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं,
जीवन को दिशा देने के लिए है।
🔔 वीडियो पसंद आए तो
👍 Like करें
💬 Comment में “जय श्रीकृष्ण” लिखें
📌 Channel को Subscribe करें
🕉️ जय श्रीकृष्ण | जय श्रीमद्भागवत
Adhyatmik Gyan | Bhakti Katha | Bhagwat Purana
कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त हो चुका था।
धर्म की विजय हुई थी, लेकिन पांडवों के हृदय में उल्लास नहीं—केवल वेदना, वैराग्य और भक्ति थी।
इसी करुणामय वातावरण में आता है श्रीमद्भागवत महापुराण का प्रथम स्कंध – अष्टम अध्याय,
जहाँ माता कुंती भगवान श्रीकृष्ण के सामने ऐसी प्रार्थना करती हैं,
जो आज भी हृदय को झकझोर देती है।
इस दिव्य कथा में आप जानेंगे—
🔹 अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से गर्भस्थ परीक्षित की रक्षा कैसे हुई
🔹 युद्ध के बाद भी पांडव क्यों रो रहे थे
🔹 माता कुंती भगवान से सुख नहीं, आपदाएँ क्यों माँगती हैं
🔹 “विपदाः सन्तु ताः शश्वत्” का गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य
🔹 निष्काम भक्ति क्या होती है और कुंती उसमें सर्वोच्च क्यों हैं
यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं,
👉 जीवन को समझने और जीने के लिए है।
यदि आपके जीवन में दुःख है, संकट है, या मन अशांत है—
तो यह भागवत कथा आपको कृष्ण से जोड़ देगी।
🙏 इस दिव्य कथा को अंत तक अवश्य सुनें
🙏 भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम
जय श्रीकृष्ण | राधे राधे
श्रीमद्भागवत महापुराण – प्रथम स्कंध, सप्तम अध्याय
यह केवल एक कथा नहीं…
यह करुणा, धर्म और ईश्वरीय न्याय की जीवंत परिभाषा है।
महाभारत युद्ध के बाद
जब सब कुछ समाप्त हो चुका था,
तब द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने
ऐसा घोर अपराध किया
जिसे स्वयं शास्त्र भी काँप उठे।
😢 सोते हुए द्रौपदी के पाँचों पुत्रों की हत्या
⚔️ अर्जुन का प्रतिशोध
☄️ ब्रह्मास्त्र का प्रलयकारी प्रयोग
🌸 और एक माँ की अद्भुत करुणा
इस अध्याय में हमें मिलता है —
✔️ क्रोध और प्रतिशोध का परिणाम
✔️ द्रौपदी जैसी नारी की महानता
✔️ भगवान श्रीकृष्ण का संतुलित न्याय
✔️ और भागवत का अमर संदेश — “करुणा ही परम धर्म है”
🙏 यह कथा हर उस व्यक्ति को सुननी चाहिए
जो जीवन में अन्याय, क्रोध या पीड़ा से गुजर रहा है।
📌 वीडियो पसंद आए तो
👍 Like करें
🔔 Channel Subscribe करें
📤 कथा को अधिक से अधिक लोगों तक Share करें
जय श्रीकृष्ण 🕉️
🔎 SEO HASHTAGS
#ShrimadBhagwat
#BhagwatKatha
#Ashwatthama
#Draupadi
#Krishna
#Mahabharat
#AdhyatmikGyan
#Bhakti
#SanatanDharma
🙏 नारायण… नारायण… 🙏
श्रीमद्भागवत महापुराण के
प्रथम स्कंध – षष्ठम अध्याय की
यह दिव्य कथा
हमें सिखाती है कि—
👉 भक्ति जन्म से नहीं, संग से मिलती है
👉 सेवा सबसे बड़ा साधन है
👉 भगवान भाव देखते हैं, पहचान नहीं
इस कथा में आप जानेंगे—
🔹 नारद मुनि का पूर्वजन्म
🔹 कैसे एक दासी का पुत्र बना देवर्षि
🔹 संतों की जूठन का आध्यात्मिक रहस्य
🔹 भगवान श्रीहरि का साक्षात दर्शन
🔹 भक्ति, वैराग्य और मोक्ष का मार्ग
यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं,
जीने के लिए है।
यदि यह कथा
आपके हृदय को छू जाए
तो—
👍 वीडियो को LIKE करें
📌 CHANNEL को SUBSCRIBE करें
🔔 BELL ICON दबाएँ
और COMMENT में लिखें—
✨ “नारायण… नारायण…” ✨
🙏 जय श्रीकृष्ण | जय श्रीहरि 🙏
🔎 TAGS (कॉपी-पेस्ट के लिए)
Copy code
Shrimad Bhagwat Katha
Narad Muni Story
Bhagwat Purana Chapter 6
Narad Muni Janm Katha
Bhakti Katha Hindi
Sanatan Dharma Katha
Spiritual Story Hindi
Narayan Narayan
महर्षि वेदव्यास ने चारों वेद, उपनिषद, महाभारत और अठारह पुराणों की रचना कर दी…
फिर भी उनका हृदय अशांत, उदास और खाली क्यों रह गया?
श्रीमद्भागवत महापुराण – प्रथम स्कंध, पंचम अध्याय में
देवर्षि नारद मुनि व्यास जी से वह प्रश्न करते हैं,
जो आज हर साधक, हर भक्त और हर इंसान के जीवन से जुड़ा है —
👉 क्या केवल ज्ञान और कर्म ही पर्याप्त हैं?
👉 भगवान श्रीहरि का गुणगान किए बिना धर्म अधूरा क्यों है?
👉 भक्ति के बिना मोक्ष संभव क्यों नहीं?
इस अध्याय में नारद मुनि स्पष्ट शब्दों में बताते हैं कि
जो ग्रंथ भगवान के नाम, लीला और महिमा का गुणगान नहीं करते,
वे समाज को सत्य मार्ग नहीं दे सकते।
यह अध्याय हमें सिखाता है कि —
✨ सच्चा सुख केवल श्रीहरि की भक्ति में है
✨ भक्ति ही ज्ञान को पूर्ण करती है
✨ और यही श्रीमद्भागवत की दिव्य आधारशिला है
🔔 यह कथा केवल पुराण नहीं,
बल्कि आज के टूटे मन और भटके जीवन का उत्तर है।
📿 पूरा अध्याय सुनिए, समझिए और अपने जीवन में उतारिए।
जय श्रीकृष्ण 🙏
Adhyatmik Gyan | Bhagavat Katha | Sanatan Dharma
“सब कुछ लिख दिया, फिर भी मन अशांत! | महर्षि व्यास का वैराग्य और नारद का दिव्य उपदेश | श्रीमद्भागवत 1
नमस्कार भक्तों 🙏
स्वागत है आपका Adhyatmik Gyan चैनल पर।
इस दिव्य कथा में आप सुनेंगे श्रीमद्भागवत महापुराण – प्रथम स्कंध, चतुर्थ अध्याय की वह गूढ़ और जीवन बदल देने वाली कथा,
👉 जब महर्षि वेदव्यास ने वेद, उपनिषद, पुराण और महाभारत जैसे महान ग्रंथों की रचना कर ली —
लेकिन फिर भी उनका हृदय अशांत था।
❓ आख़िर क्यों?
❓ क्या ज्ञान और कर्म से पूर्ण संतोष नहीं मिलता?
❓ नारद मुनि ने व्यास जी को ऐसा क्या उपदेश दिया जिससे श्रीमद्भागवत का प्राकट्य हुआ?
✨ इस कथा में जानिए — • व्यास जी का आंतरिक वैराग्य
• नारद मुनि का दिव्य उपदेश
• भक्ति क्यों है ज्ञान और कर्म से भी श्रेष्ठ
• श्रीमद्भागवत की रचना का वास्तविक कारण
• कलियुग के लिए सबसे सरल मोक्ष मार्ग
📿 यह कथा केवल सुनने के लिए नहीं,
👉 जीवन में उतारने के लिए है।
वीडियो को अंत तक अवश्य देखें,
👍 पसंद आए तो Like,
🔔 Subscribe और
🕉️ Share ज़रूर करें।
जय श्रीकृष्ण 🙏
🔍 Hashtags (Reach बढ़ाने के लिए)
#ShrimadBhagwat
#BhagwatKatha
#NaradMuni
#VedVyas
#BhaktiMarg
#SanatanDharma
#AdhyatmikGyan
#bhagwatpurana
जब-जब इस धरती पर अधर्म बढ़ा…
जब-जब सत्य कमजोर पड़ा…
जब-जब भक्तों की आह ने आकाश को कंपाया…
तब-तब भगवान स्वयं अवतार लेकर प्रकट हुए।
श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के तृतीय अध्याय में भगवान श्रीहरि के उन्हीं दिव्य अवतारों की अलौकिक गाथा वर्णित है, जिनका उद्देश्य केवल असुरों का विनाश नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना, भक्तों की रक्षा और जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना रहा है।
इस कथा में आप जानेंगे—
🔱 भगवान अवतार क्यों लेते हैं?
🔱 कुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, ऋषभदेव जैसे अवतारों का गूढ़ रहस्य
🔱 अवतारों के पीछे छिपा आध्यात्मिक संदेश
🔱 और क्यों श्रीकृष्ण को कहा गया है पूर्णावतार — “कृष्णस्तु भगवान् स्वयं”
यह कथा केवल सुनने की नहीं, अनुभव करने की है।
यह हमें सिखाती है कि ईश्वर दूर नहीं हैं—वे हमारे हृदय में निवास करते हैं और संकट की घड़ी में अवश्य आते हैं।
यदि आप भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के इस अमृत से अपने जीवन को आलोकित करना चाहते हैं, तो यह दिव्य गाथा आपके लिए है।
✨ श्रवण करें, चिंतन करें और भगवान की शरण में स्वयं को समर्पित करें।
हरि: ॐ तत्सत् 🌸📿
कलियुग के इस घोर अंधकार में जब मनुष्य दिशा-भ्रम, अशांति और असंतोष से घिरा हुआ है, तब श्रीमद्भागवत महापुराण एक दिव्य प्रकाश-स्तंभ बनकर मार्ग दिखाता है। प्रथम स्कंध के द्वितीय अध्याय में उद्घोषित यह अमर संदेश स्पष्ट करता है कि कर्म, ज्ञान और तप का अंतिम लक्ष्य केवल भगवान की निष्काम भक्ति है।
नैमिषारण्य के पावन वन में ऋषि-मुनियों के प्रश्न और महाज्ञानी सूतजी के उत्तर केवल शास्त्रीय संवाद नहीं, बल्कि समस्त मानवता के लिए जीवन-मार्गदर्शक हैं। यह अध्याय सिखाता है कि संसार की दावानल में जलती आत्मा को शांति, तृप्ति और मोक्ष केवल भगवान श्रीहरि की शरण में ही प्राप्त होता है।
यह कथा बताती है कि सच्चा धर्म किसी बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि हृदय से उपजी निष्काम भक्ति में है। कलियुग में जहाँ साधन सीमित हैं, वहीं भगवान का नाम-स्मरण ही सबसे सरल, सबसे प्रभावी और सबसे शक्तिशाली साधना है।
यह केवल एक अध्याय नहीं, बल्कि एक दिव्य पुकार है—
👉 अहंकार त्यागो
👉 भक्ति को अपनाओ
👉 और भगवान की शरण में जाकर जीवन को सार्थक बनाओ
श्रीमद्भागवत का यह अमर संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना युगों पहले था— क्योंकि जहाँ भक्ति है, वहीं सच्चा धर्म है, और वहीं परम शांति।
🙏 हरि नाम स्मरण से जीवन में प्रकाश पाएं।
#श्रीमद्भागवतमहापुराण
#BhagwatKatha
#KalYug
#KrishnaBhakti
#SanatanDharma
#SpiritualWisdom
#HinduScripture
#bhaktimarg
#adhyatmikgyan #futureprediction #SpiritualPodcast
#jyotishsepare #divineexperience #IndianSpirituality
#sansanikhabar #mysterypodcast #bhavishya
Description
ईरान इस वक्त गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है।
एक तरफ सड़कों पर सरकार के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन,
तो दूसरी तरफ युद्ध की खुली तैयारी।
इसी बीच भारत सरकार ने बड़ी चेतावनी जारी करते हुए सभी भारतीय नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
इस वीडियो में हम आपको बताएंगे👇
🔴 ईरान में आखिर हो क्या रहा है?
🔴 प्रदर्शनकारियों पर फांसी और सख़्त कानून
🔴 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव
🔴 भारत की एडवाइज़री के पीछे की असली वजह
🔴 ईरान में फंसे 3000 भारतीय छात्र और उनके परिवारों की चिंता
🔴 कारगिल में खामनेई के समर्थन में रैली क्यों निकाली गई?
🔴 क्या ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध तय है?
🔴 क्या दुनिया एक और बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ी है?
ईरान में इंटरनेट बंद, हालात बेकाबू और हालिया हिंसा ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।
भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क है और लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए है।
📺 पूरा सच जानने के लिए वीडियो अंत तक देखें।
🛑 वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
🔎 Hashtags (ज़रूर डालें)
#irancrisis #iranwar #indiaadvisory #BreakingNews
#worldscopenews #iranprotests #IranVsAmerica
#indianstudentsabroad #geopolitics #middleeastcrisis
इस विडिओ में आगे होने वाले परिवर्तन को बेहतर ढंग से बताया गया है
#बाबा। #वेंगा #नास्त्रेदमस
#new#year#bhavishyavaniya#sanklp
जब श्रीराम ने सुबाहु और मारीच को मारा
