AARYANSHARMA444
AARYANSHARMA444

AARYANSHARMA444

      |      

abonnees

   Laatste video's

AARYANSHARMA444
9 Bekeken · 3 uur geleden

⁣राजा का उत्तराधिकारी कौन ? | hindi stories/moral stories/bed time stories/stories in hindi

topic

hindi stories

moral stories interesting khaniya

stories in hindi

hindi in stories

raja ki kahani

best khaniya

AARYANSHARMA444
10 Bekeken · 1 dag geleden

⁣विश्वासघात- राजा रानी की कहानी | hindi stories/moral story/bed time story/hindi khaniya/interesting khaniya/stories in hindi

topic cover

विश्वासघात- राजा रानी की कहानी

hindi stories

hindi khaniya

moral stories

bed time stories

interesting khaniya

best khaniya interesting khaniya

AARYANSHARMA444
10 Bekeken · 2 dagen geleden

⁣राजा tota की कहानी | hindi stories/moral story/bed time story/hindi khaniya/interesting khaniya/stories in hindi
topic cover
hindi stories
hindi khaniya
moral stories
bed time stories
interesting khaniya
best khaniya interesting khaniya
Aaryan Sharma khaniya

AARYANSHARMA444
11 Bekeken · 3 dagen geleden

⁣किस्सा गधे, बैल और उनके मालिक का : अलिफ़ लैलाn

Kissa Gadhe Bail Aur Unke Malik Ka : Alif Laila

hindi stories alif laila #video #viral video

asie hi kahaniyon ko sune chalaane ko subscribe karo

AARYANSHARMA444
5 Bekeken · 1 maand geleden

⁣माधोपुर के पुराने नगर निगम दफ़्तर में हर फ़ाइल तभी चलती थी, जब जेबें गरम होती थीं। लेकिन इसी भ्रष्ट सिस्टम के बीच एक ऐसा क्लर्क था—कैलाशनाथ ओझा, जिसे लोग सम्मान से बाबूजी कहते थे।

30 साल की नौकरी, गरीब घर, बीमार पत्नी, और बेटे की भारी इंजीनियरिंग फ़ीस… मजबूरी ने उन्हें रिश्वत के दलदल में धकेल तो दिया था, लेकिन दिल अब भी ईमानदार था।
इसी बीच आती है—जानकी देवी, एक विधवा माँ, जिसकी छत बरसात में टपक रही थी और जिसकी जेब में थे सिर्फ़ ₹500। जब उसने कांपते हाथों से बाबूजी के सामने वह मुड़ा हुआ लिफ़ाफ़ा रखा, तो बाबूजी के भीतर कुछ टूट गया।
उस दिन बाबूजी ने एक ऐसा फ़ैसला लिया जिसने पूरे शहर को हिला दिया—

उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार कर दिया।

अपने बेटे की फ़ीस दाँव पर लगा दी।

अपनी नौकरी को संकट में डाल दिया।

लेकिन एक बेबस माँ के आँसू को रिश्वत नहीं बनने दिया।
इस कहानी में है मानवता की जीत, भ्रष्ट सिस्टम पर चोट, और एक साधारण क्लर्क की असाधारण ईमानदारी—

जो साबित करती है कि एक ‘ना’ पूरी दुनिया बदल सकती है।
क्या एक पिता अपने बेटे का भविष्य खोकर भी अपना सम्मान बचा पाया?

क्या सिस्टम उसकी ईमानदारी को कुचल पाया?

या फिर माधोपुर में सच की गूँज ने कोई नया इतिहास रच दिया?
यह कहानी आपको अंत तक बाँधे रखेगी…

और शायद आपकी आँखें भी नम कर दे।

AARYANSHARMA444
4 Bekeken · 2 maanden geleden

⁣कहानी का विवरण: "जर्जर स्कूल और एक नई जिलाधिकारी" - बदलाव की कार्यशाला ✍

​"किसी भी राष्ट्र या जिले के बदलाव की शुरुआत हमेशा बच्चों से होती है।"

​🌟 कहानी का सार (Synopsis)

​शांतिनगर, नाम में शांति रखने वाला एक शहर, जो वर्षों के भ्रष्टाचार, प्रशासनिक उदासीनता और जर्जर सरकारी स्कूलों की काली छाया में जी रहा था। इसी निराशा के माहौल में, मात्र 32 वर्ष की तेज-तर्रार और संवेदनशील जिलाधिकारी (DM) सुश्री आरुषि शर्मा पदभार संभालती हैं। वह घोषणा करती हैं कि उनका दफ्तर 'कागज़ों का ढेर नहीं, बल्कि बदलाव की कार्यशाला' बनेगा।

​आरुषि, चमकीली रिपोर्ट्स को दरकिनार कर, जमीनी सच्चाई जानने के लिए खुद निकल पड़ती हैं। उनका औचक दौरा उन्हें बस्ती नं. 3 के एक प्राथमिक स्कूल में ले जाता है, जहाँ वह प्रशासनिक विफलता का सबसे मार्मिक दृश्य देखती हैं: सात साल की बच्ची रेशमा की खाली प्लेट, जिसमें परोसा गया 'कीड़ा वाला' अखाद्य मिड-डे मील (MDM) खाने से उसने इनकार कर दिया था।

​यह खाली प्लेट आरुषि के लिए सिर्फ भोजन की कमी नहीं,

Laat meer zien