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Nkm mix
9 विचारों · 14 घंटे पहले

⁣समुद्र अचानक सूख गया।
जहाँ कभी लहरों की आवाज़ से हवा काँपती थी, वहाँ अब अजीब-सी ख़ामोशी पसरी है। नीला विस्तार पल भर में धूसर मैदान बन गया—फटी हुई ज़मीन, नमक की सफ़ेद परतें और सीपियों के टूटे अवशेष। जहाज़ जो कभी गर्व से तैरते थे, अब रेत में फँसे हुए कंकाल जैसे खड़े हैं। मछलियों की चमकती देह धूप में बुझ चुकी है, और समुद्री घास सूखे बालों की तरह बिखरी पड़ी है।
हवा में अब नमक की ठंडक नहीं, बल्कि जली हुई मिट्टी की गंध है। क्षितिज तक फैला खालीपन आँखों को चुभता है, मानो प्रकृति ने अपनी साँस रोक ली हो। लोग किनारे पर खड़े हैं—कोई अविश्वास में, कोई डर में, कोई सवालों से भरा हुआ। समुद्र के बिना तट अपनी पहचान खो चुका है, और इंसान पहली बार समझ रहा है कि जिसकी आदत हो जाती है, उसके बिना दुनिया कितनी सूनी लगती