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झोले में यादें और पैरों में पहिए! मैं मंज़िल ढूँढने नहीं, खुद को खोने निकलता हूँ। मेरी दुनिया बस उन रास्तों में है जहाँ भीड़ कम और सुकून ज़्यादा है। स्वागत है मेरे इस पागलपन भरे सफर में!"