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महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे। उन्हें जैन धर्म के वास्तविक संस्थापकों में से एक माना जाता है, जिन्होंने इस धर्म को एक सुव्यवस्थित रूप दिया।
​यहाँ उनके बारे में कुछ मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
​जन्म: उनका जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व (कुछ स्रोतों के अनुसार 540 ईसा पूर्व) बिहार के कुंडलपुर (वैशाली) में एक राजपरिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम वर्धमान था।
​वैराग्य: 30 वर्ष की आयु में उन्होंने सांसारिक सुखों को त्याग दिया और सत्य की खोज में संन्यास ले लिया।
​ज्ञान की प्राप्ति (कैवल्य): 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद उन्हें 'ऋजुपालिका' नदी के तट पर 'कैवल्य ज्ञान' (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त हुआ, जिसके बाद वे 'महावीर' (महान पराक्रमी) और 'जितेन्द्रिय' (इंद्रियों को जीतने वाले) कहलाए।
​मुख्य शिक्षाएँ (पंच महाव्रत): उन्होंने जीवन को पवित्र और अहिंसामय बनाने के लिए 5 सिद्धांत दिए:
​अहिंसा (किसी जीव को चोट न पहुँचाना)
​सत्य (हमेशा सच बोलना)
​अस्तेय (चोरी न करना)
​अपरिग्रह (धन या वस्तुओं का संचय न करना)
​ब्रह्मचर्य (पवित्र जीवन जीना - यह व्रत महावीर जी ने जोड़ा था)
​निर्वाण (मोक्ष): 72 वर्ष की आयु में बिहार के पावापुरी में उन्हें मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त हुआ।
​संक्षेप में: महावीर स्वामी ने पूरी दुनिया को जियो और जीने दो का संदेश दिया और आत्म-कल्याण के साथ-साथ सभी जीवों के प्रति दया भाव रखने की सीख दी।see the vedio comment how helpful for you.