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Kratke hlače Stvoriti

*।।ओ३म्।।*

🙏 सादर नमस्ते जी।

*∆∆• स्वयंभूरसि श्रेष्ठो रश्मिर्वर्चोदाऽअसि०॥(यजु० २-२६)*

*भावार्थ:-* *परमेश्वर और विद्वान् जीव का कोई माता-पिता नहीं है किंतु यही (परमेश्वर ही) सब का माता-पिता है तथा जिस से बढ़कर कोई विज्ञानप्रकाशक विद्या देने वाला नहीं है अतः सब मनुष्य को इस परमेश्वर ही की आज्ञा में वर्तमान होना चाहिए॥*

(महर्षिदयानंदकृत यजुर्वेदभाष्य से उद्धृत)

प्रस्तुति:- ध्रुवदेव, दर्शनयोग महाविद्यालय, आर्यवन, रोजड

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📜 मंत्र एवं भावार्थ
ॐ असतो मा सद्गमय । > तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥
अर्थ: * असतो मा सद्गमय: हे ईश्वर, मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो।
तमसो मा ज्योतिर्गमय: मुझे अंधकार (अज्ञान) से प्रकाश (ज्ञान) की ओर ले चलो।

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।। *ओ३म्* ।।
🙏सादर नमस्ते जी।

¶• *जैसे हाथ आदि अवयवों के बिना परमेश्वर ने सब जगत् को रचा है वैसे ही वेदों को भी सब साधनों के बिना रचा है क्योंकि ईश्वर सर्वशक्तिमान् है। सृष्टि के प्रारंभ में अग्नि, वायु आदित्य और अंगिरा इन चार ऋषियों के ज्ञान के बीच में अपनी वेदविद्या को प्रेरित करके उनके द्वारा ईश्वर ने वेद प्रकाशित किए।*

* *टिप्पणी:-* जैसे मनुष्य मुख आदि साधनों से शब्दों का उच्चारण करते हैं वैसे ही परमेश्वर ने अपने अनंत सामर्थ्य से कार्यशब्दरूपी वेद का उच्चारण करके सृष्टि के प्रारंभ में चार ऋषियों के अंतःकरण में प्रेषित किया।

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