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Corti Creare
"बुद्धि और किस्मत का बंटवारा" एक कहानी है जिसमें बुद्धि और भाग्य के बीच के रिश्ते को दर्शाया गया है। यह कहानी अक्सर इस बात पर जोर देती है कि बुद्धि और किस्मत दोनों ही जीवन में महत्वपूर्ण हैं और इनमें से किसी एक को दूसरे से श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता। यह कहानी सिखाती है कि कभी-कभी बुद्धिमान होने के बावजूद किस्मत का साथ न होना और किस्मत का साथ होना दोनों ही बातें मायने रखती हैं।
बुद्धि की क्षमता: बुद्धि के बल पर व्यक्ति अपने कौशल और विवेक से बहुत कुछ हासिल कर सकता है और परिस्थितियों को अपने पक्ष में कर सकता है।
किस्मत का महत्व: लेकिन यह भी सच है कि भाग्य का साथ भी जरूरी है। कहानी में कई बार ऐसा दिखाया गया है कि जो बहुत बुद्धिमान था, वह भाग्य के कारण हार गया, और जो साधारण था, उसकी किस्मत चमक गई।
सीख: इसलिए, कहानी की सीख यह है कि व्यक्ति को अपनी बुद्धि का अहंकार नहीं करना चाहिए और न ही केवल भाग्य पर निर्भर रहना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए बुद्धि और भाग्य दोनों का संतुलन आवश्यक है।
स्कूल का खाना चोरी" (school ka khana chori) से जुड़ी कई वास्तविक खबरें और कहानियाँ वायरल हुई हैं, जिनमें स्कूल स्टाफ द्वारा मिड-डे मील (Mid-Day Meal) सामग्री का दुरुपयोग या चोरी शामिल है।
कुछ प्रमुख वायरल मामले और चर्चाएँ निम्नलिखित हैं:
मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) राशन चोरी: जनवरी 2024 में, मिर्जापुर के एक कंपोजिट स्कूल से मिड-डे मील का 21 बोरी गेहूं और 23 बोरी चावल चोरी हो गया था। इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल और सहायक अध्यापक को गिरफ्तार कर निलंबित कर दिया गया था।
बिहार में अंडे की चोरी: दिसंबर 2024 में, बिहार के हाजीपुर में एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर का बच्चों के मिड-डे मील के लिए आए अंडे चुराते हुए वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की।
गया (बिहार) में चावल चोरी: गया में भी एक सरकारी स्कूल के शिक्षक मिड-डे मील का चावल चुराते और बाजार में बेचते हुए वीडियो में कैद हुए थे, जिसके बाद जिलाधिकारी ने कार्रवाई का आदेश दिया।
बस्ती (उत्तर प्रदेश) में चोरों ने खाए चने-पकौड़ी: अक्टूबर 2023 में, बस्ती के एक स्कूल में चोरों ने पहले मिड-डे मील के लिए रखे चने खाए, पकौड़ी बनाई और फिर बाकी सामान लेकर फरार हो गए। यह घटना भी काफी चर्चा में रही।
इन घटनाओं पर सोशल मीडिया और समाचारों में व्यापक चर्चा हुई है, जिसमें सरकारी स्कूलों में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार को लेकर लोगों ने रोष व्यक्त किया है। ये मामले अक्सर दिखाते हैं कि बच्चों के पोषण के लिए आई सामग्री का किस तरह दुरुपयोग किया जाता है।
