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सूर्य की तरह चमकें! मणिपुर चक्र की ऊर्जा आपके आत्मविश्वास और संकल्प शक्ति का आधार है।" 🔥🟡
अपनी आंतरिक शक्ति (Will Power) को पहचानें। आप जो चाहते हैं, उसे पाने की सामर्थ्य रखते हैं।

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ध्यान समाधि

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⁣क्या आप जानते हैं कि आपके भीतर दो विपरीत ऊर्जाएं हर समय बह रही हैं? हमारे शरीर का बायां हिस्सा (ईड़ा) शीतलता और भावनाओं का प्रतीक है, जबकि दायां हिस्सा (पिंगला) शक्ति और तर्क का।
​जब ये दोनों ऊर्जाएं असंतुलित होती हैं, तब हम तनाव, क्रोध या आलस महसूस करते हैं। ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से जब ये दोनों धाराएं मिलती हैं, तब 'सुषुम्ना' नाड़ी जागृत होती है—जो सीधे समाधि और आत्म-साक्षात्कार का द्वार है।
​इस हिमालय की पवित्र ऊर्जा से भरी पोस्ट को देखें और समझें कि कैसे आप अपने भीतर के सूर्य और चंद्रमा को संतुलित कर सकते हैं। 🧘‍♂️🏔
​आज का संकल्प: मैं अपनी सांसों के प्रति सजग रहूँगा और 'अनुलोम-विलोम' के माध्यम से स्वयं को संतुलित करूँगा।
​कीवर्ड्स (Keywords for SEO)
​ईड़ा पिंगला सुषुम्ना, नाड़ी शोधन प्राणायाम, ध्यान से समाधि, चक्र संतुलन, हिमालय मेडिटेशन, आध्यात्मिक चेतना, कुण्डलिनी जागरण, मन की शांति के उपाय, योग विज्ञान, भारतीय दर्शन।
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ध्यान समाधि

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शरीर जड़ यंत्र है और चेतना (आत्मा) वह बिजली है जिससे यह यंत्र सक्रिय होता है।

​तो फिर भोगता कौन है?

​जन्म-मरण, सुख-दुख और पाप-पुण्य का भोग न तो शुद्ध चेतना करती है और न ही मृत शरीर। इसे भोगता है 'अहंकार' (Ego)।

​जब चेतना स्वयं को इस शरीर और मन के साथ जोड़ लेती है (तादात्म्य कर लेती है), तो एक मिथ्या सत्ता पैदा होती है जिसे हम 'मैं' (अहंकार) कहते हैं।

​यह 'मैं' ही कहता है—मैंने खाया, मैं दुखी हूँ, मैंने पाप किया।

​चेतना केवल शक्ति देती है, लेकिन भोगता वह 'अहंकार' है जो स्वयं को शरीर मान बैठा है।

ध्यान समाधि

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